
नर्मदापुरम। देश की सबसे खूबसूरत और शांत नदियों में शुमार मध्यप्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा बीते कुछ दिनों से कराह रही है। सनातन धर्म के विभिन्न पुराणों में वर्णित इस पतित-पावन नदी के दर्शन भर को अनेक जन्मों के लिए पुण्यदायी माना गया है। हर माह पूर्णिमा और अमावस्या के दिन इसके तट पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ जाता है। मगर मंथर गति से कल-कल बहते इसके पानी में अब उसकी पीड़ा सुनाई देती है। सर्वाधिक दु:खद बात यह है कि हज़ारों लाखों भक्तों, पर्यावरण प्रेमियों और इसे बचाने के लिए तैयार बड़ा सरकारी अमला होने के बाद भी हमारी पावन रेवा अपने दुश्मनों के बीच अकेली है। इसकी माटी का हर कंकर शंकर है मगर इसके खूबसूरत अस्तित्व और सुंदर घाटों को बचाने कोई भी सामने नहीं आ रहा। यहां कुछ रेत माफियाओं की कारस्तानी से अब इसके मनोरम घाट अपनी प्राकृतिक सुंदरता को खोने लगे हैं।

अस्वीकृत खदानों से भी खनन
जानकारी के अनुसार रेत माफिया की करतूतों से अब इसका कोई भी घाट और किनारा अछूता नहीं रहा है। ये दिन रात मां रेवा का सीना धड़ल्ले से छलनी किया जा रहा है। यहां एनजीटी, हाईकोर्ट न्यायालय, मध्यप्रदेश शासन का राजपत्र और अधिनियम होने के बावजूद पोकलेन मशीनों से नर्मदा में दिन-रात खनन किया जा रहा है। इस मामले में जिला मुख्यालय के समीप संचालित बावरी रेत खदान काफी बदनाम है। एनजीटी की रोक के बावजूद यहां धड़ल्ले के साथ मशीनों से अवैध खनन किया जा रहा है। यह जानकारी सभी अधिकारियों को होने के बावजूद क्यों चुप बैठे हैं ये सभी अफसरशाह, उनकी चुप्पी सवालों के घेरे में बनी हुई है।

माना जा रहा है कि रात्रि में अवैध खनन और परिवहन का यह कार्य खनिज एवं राजस्व अधिकारियों के संरक्षण में खुलेआम चल रहा है। बताया जाता है कि इसमें सबके हक का हिस्सा बाक़ायदा मिल जाता है। इस कारण कोई भी कार्यवाही नहीं हो पा रही है।
बेअसर रही सीएम की दहाड़
कुछ दिनों पूर्व मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंच से दहाड़ते हुए कहा था कि माफ़िया कोई भी हो, या तो वो क्षेत्र छोड़ दे या उसे मैं जमीन में गाड़ दूँगा। इसके बावजूद इन रेत माफियाओ मैं भय क्यों नहीं है।
सिंडीकेट बनाकर काम कर रही कंपनियां

बीते दिनों मध्यप्रदेश शासन ने नर्मदा को जीवित इकाई का दर्जा दिया है। लेकिन जिले में अनेक कंपनियां सिंडिकेट बनाकर मां नर्मदा को खोखला करने में लगी हुई है। यहां बता दें कि नर्मदापुरम जिले में 118 खदाने हैं लेकिन 4 खदानों को ही स्वीकृति मिली है। इसमें जिले की सिवनी-मालवा तहसील अंतर्गत बाबरी रेत खदान अभी स्वीकृत नहीं है। इसके बावजूद सिल्वरमिस्ट नामक कंपनी बाबरी खदान पर पोकलेन से भारी मात्रा में नर्मदा में अवैध उत्खनन कर रही है। रोजाना इस कंपनी द्वारा शाम होते ही रेत के अवैध डंपरों को खदान में उतार कर रोजाना लगभग 100 गाड़ियों से रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा है। यहां के ग्रामीणों ने एक ज्ञापन सौंपकर सिवनी मालवा एसडीएम, तहसीलदार से रेत के अवैध कारोबार को तत्काल प्रभाव से बंद करने की गुहार लगाई थी। लेकिन जिला प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रैंगी।
मीडिया में भी उछला मामला
मीडिया ने भी कई बार माईनींग ऑफ़िसर एवं माइनिंग इंस्पेक्टर ने कोई ध्यान नहीं दिया। इस पर ग्रामीणों ने खनिज अधिकारी देवेश मकराम को मौके पर बुलाकर पौकलेन से काम होना बताया। उसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। इससे लगता है कि इस रेत कंपनी को माइनिंग अधिकारी श्री मरकाम एवं माइनिंग इंस्पेक्टर पिंकी चौहान का खुला संरक्षण है।