December 1, 2025 |

ऐसा लगता नहीं कि वो अब हमारे बीच नहीं

ठंडी हवा के झोकों से वह खुश्बू जाती नहीं

Hriday Bhoomi 24

*ऐसा लगता नहीं कि वो अब हमारे बीच नहीं*

    #प्रदीप शर्मा, हरदा

कभी भी चले आइए

इस मीडियाखाने पर

वो खरखराती आवाज,

जोर की हंसी,

और हौले से पीठ पर थपकी देने वाली शख्सियत नजर आती नहीं/

क्योंकि पने जिस जिंदादिल इंसां के साथ कुछ पल गुजारे हैं, आज वह हमारे बीच नहीं/

सुना है मैंने भी कि
वो शख्स कहीं दूर चला गया/
फिर भी ठंडी हवा के झोंकों से उसकी खुश्बू जाती नहीं/
अभी कल ही की तो बात है जब मुझसे फोन पर कहा था बड़े जरा देख लेना, अब फोन की वो घंटी घनघनाती नहीं/
चला गया एक पल में छोड़कर वह,
मगर कमबख्त यादें हैं जो भुलाए जाती नहीं/
खिरकिया के मरहूम पत्रकार हाजी रफीक खान साहब को इन लफ्जों के साथ याद करना सचमुच बहुत दुखद पहलू है।

-हर छोटे-बड़े इंसां के साथ बैठकर उनके दर्द बांटना, दोस्तों को हिम्मत देना और वक्त-ए-जरूरत काम आना शायद ऐसी कई खूबियों वाले इंसां की अब दूसरी तलाश करना उसी तरह मुमकिन नहीं, जिस तरह भूसे के ढेर सुई ढूंढ पाना।
-मगर इस बड़ी दुनिया में कोई और होगा, यह नामुमकिन भी नहीं।

(स्वागत है आप सभी की राय या टिप्पणियों का) 


Hriday Bhoomi 24

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