
दो दिन की है कहानी
हां ये कहानी दो दिन की है। फिर कोई
नहीं मिलेगा।
न मैं,
न आप,
न कोई और..
हा.. हा.. हा..
बाबू मोशाय कहीं डर तो नहीं गए…
कि ये जिंदगी छोटी है और बड़ी लंबी… होनी चाहिए।
मगर बाबू मोशाय
ये *बड़ी* जरूर होनी चाहिए।
– – –
बाबू मोशाय ये जिन्दगी ऊपर वाले के हाथ है
कौन कहां कब
इस रंगमंच से उठ जाएगा
किसी को पता नहीं।
हा… हा… हा……
