#राजनीति : पहले फाड़ा मनमोहन का प्रस्ताव, अब कर रहे सम्मान
पूर्व प्रधानमंत्री एवं अर्थशास्त्री स्व.मनमोहन सिंह को नमन

प्रदीप शर्मा संपादक।
भारतीय राजनीति में कैसी विडंबना है कि देश की सबसे बड़ी कांग्रेस पार्टी ने भरी सदन में अपने ही प्रधानमंत्री व सदन के नेता मनमोहन सिंह का प्रस्ताव फाड़ा और अब उनके दिवंगत होने पश्चात बहा रहे हैं टेसू-पर-टेसू, और कर रहे तुलना।
अबूझ है ये परिपाटी –
हमारे देश में महान शख्सियतों के बीच आपसी तुलना करने की परिपाटी से आज भी हमारा जनमानस अछूता नहीं है। हम दो शख्सियतों के बीच तुलना करते समय अक्सर भूल जाते हैं कि उनके बीच देश, काल-समय और स्थिति परिस्थिति की भूमिका विशेष होती है। अन्यथा हर कोई शख्स मुकाबले के लिए तैयार है।
एक बार फिर तुलना का बाजार गर्म –
बहरहाल इन दिनों पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का निधन होने पश्चात उनके कार्यकाल और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 10 साल को लेकर सोशल मीडिया में ‘तुलना’ का बाजार गर्म है। यहां हम बता दें कि मनमोहन सिंह की जिन नीतियों को लेकर एक दल विशेष के लोग अपनी पीठ ठोककर परोक्ष रूप से एक घराने को श्रेय देने की कोशिश रहे हैं, उसकी शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री पीव्ही नरसिंहराव के कार्यकाल में हो चुकी थी। तब यह माना जा रहा था कि राव की सरकार नेहरू माॅडल से हटकर काम करना चाहती है।
उनके प्रस्तावों की हुई थी फजीहत-
आपको यह बता दें कि दुनिया के सबसे बड़े अर्थशास्त्री के रूप में शुमार पूर्व प्रधानमंत्री जब लोकसभा में एक नीति का प्रस्ताव लेकर सदन में आए थे, तब विपक्ष के स्थान पर कांग्रेस के युवराज ने सार्वजनिक रूप से प्रस्ताव के मसौदे को फाड़कर अपने ही प्रधानमंत्री का भरी सदन में अपमान किया था। इसलिए अब मनमोहन को लेकर चल रही अच्छी बातों का श्रेय लेना उन्हें कदापि नहीं शोभता।
तुलना के समय की नजाकत जानें –
यहां सबसे पहले यह आलेखक बताना चाहता है कि देहावसान के बाद कोई भी कभी किसी की आलोचना नहीं करता, लेकिन जिंदा हस्तियों को हम कोई भाव नहीं समझते। सो किसी भी व्यक्ति के जाने पश्चात उनके सदकार्यों और उन्हें याद रखा जाता है। मगर सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले लोगों की व्याख्या तो की ही जाती है। इसलिए तुलना करने के बाजार में खड़े विद्वानों को समय की नजाकत देखना चाहिए।
याद रहे आज उसी पार्टी के बड़े मगर यु. नेता ने उनके प्रस्तावों को फाड़कर, अपनी पार्टी के प्रधानमंत्री व सदन के नेता का भरी सदन में अपमान किया था।
– शेष अगले एपीसोड में …
