July 23, 2024 |

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यही रात अंतिम, यही रात भारी

बस यही जीवन का आखरी निशां होगा, यही रात अंतिम और यही रात भारी

Hriday Bhoomi 24

प्रदीप शर्मा संपादक हृदयभूमि

बस यही रात अंतिम और यही रात भारी। जीवन में हर इंसान कुछ न कुछ बड़े फैसले लेता है। इनका परिणाम भी कुछ अच्छा या बुरा भी होता है। ऐसे फैसलों को लेना किसी सामान्य व्यक्ति की बात नहीं। बस उसी घड़ी में याद आता है गीत-

“यही रात अंतिम और यही रात भारी”


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