लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों के खर्च पर कसी नकेल
95 लाख रुपए से अधिक खर्च नहीं कर पाएंगे सभी चुनाव अभ्यर्थी

प्रदीप शर्मा संपादक
लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर केंद्रीय चुनाव आयोग ने सभी अभ्यर्थियों द्वारा प्रचार-प्रसार में किए जाने वाले खर्च की सीम तय कर दी है। आयोग ने बढ़ते पेट्रोल-डीजल के भाव और महंगाई के आधार पर विशाल लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव खर्च की राशि बढ़ा दी है। हालांकि वर्तमान समय में भी इस वृद्धि के बावजूद तय खर्च सीमा काफी कम मानी जा रही है।
चुनाव खर्च सीमा बढ़ाई, मगर नाकाफी
जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग ने इस बार 2025 के चुनाव हेतु लोकसभा क्षेत्र में उतरने वाले अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम 95 लाख रुपए खर्च करने की सीमा निर्धारित की है। उनके चुनाव खर्च का हिसाब उसी दिन से शुरू माना जाएगा जिस दिन वह अपना नामांकन पर्चा चुनाव अधिकारी कार्यालय में पेश करेंगे। ज्ञात रहे कि इसके पूर्व के चुनाव में लोकसभा हेतु प्रत्याशियों के लिए खर्च की अधिकतम सीमा मात्र 30 लाख रखी थी।
चुनाव में बरसेगा काला धन
वैसे तो चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों के चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा तय करके इस बात के पूरे इंतजाम कर दिए हैं कि बड़े धनकुबेर नेता इसमें जरूरत से ज्यादा खर्च करके मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास न कर पाएं। वहीं वोट डालने के लिए राशि देकर धनकुबेर चुनाव परिणामों को प्रभावित न कर सकें। मगर बीते चुनावों में यह देखने में आया है कि काला धन इन बड़े चुनाव में काफी खर्च होता है। हालांकि इस पर नकेल कसने के लिए सभी चुनाव क्षेत्रों में बाहर से आने वाले वाहनों की जांच की जाती है ताकि काले धन का परिवहन कर चुनाव में इसे बंटवा कर मतदान को प्रभावित न किया जा सके। पिछले विधानसभा चुनाव में ही हरदा-टिमरनी क्षेत्र में प्रशासनिक अमले ने लाखों रुपए का अवैध परिवहन करते वाहनों से लाखों रुपए जप्त किए थे। बावजूद इसके यहां फिर भी काले धन की खूब वर्षा हुई थी। कसने के लिए सभी चुनाव क्षेत्रों में बाहर से आने वाले वाहनों की जांच की जाती है ताकि काले धन का परिवहन कर चुनाव में इसे बंटवा कर मतदान को प्रभावित न किया जा सके। पिछले विधानसभा चुनाव में ही हरदा-टिमरनी क्षेत्र में प्रशासनिक अमले ने लाखों रुपए का अवैध परिवहन करते वाहनों से लाखों रुपए जप्त किए थे। बावजूद इसके यहां फिर भी काले धन की खूब वर्षा हुई थी। यहां बताना आवश्यक है कि प्रत्याशी इसका उपयोग बड़ी चतुराई के साथ करते हैं।
दर्शाए वाहन से अधिक उपयोग होते हैं
ज्ञात हो कि बड़े चुनाव में उतरने वाले प्रत्याशी अपने प्रचार कार्य और चुनाव सामग्री परिवहन के लिए जितने वाहनों की संख्या निर्वाचन कार्यालय में दर्ज कराते हैं, यह संख्या उससे काफी अधिक होती है। यदि इनका खर्च और चुनाव सामग्री उपयोग का व्यय जोड़ लिया जाए तो इसकी राशि चुनाव खर्च सीमा के पार चली जाए। इसके लिए फर्जी चुनाव वाहनों का पता लगाना आवश्यक है। इन फर्जी वाहनों के उपयोग का खेल बड़ी सफाई के साथ होता है। जिसे अधिकारी पकड़ नहीं पाते।
निर्दलीय प्रत्याशी का उपयोग
राजनीतिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव प्रचार कार्य में बड़े दलों और प्रत्याशियों द्वारा निर्दलीय उम्मीदवारों का उपयोग किया जाता है। उनके लिए अधिक वाहन दर्ज कराकर इन वाहनों से अपनी सामग्री का परिवहन कराते हैं। इसका व्यय उन निर्दलियों के खाते में लिखवाकर स्वयं का खर्च कम दिखाया जाता है। इस तरह कांट्रैक्ट पर लिए वाहनों का किराया, ड्रायवर का मेहनताना, पेट्रोल, डीजल व्यय सहित अन्य खर्च स्वतंत्र उम्मीदवारों के चुनाव व्यय में दिखाकर, अपने मूल खर्च की राशि खर्च की जाती है। यह सब कुछ गड़बड़झाला इतनी सफाई के साथ किया जाता है कि तमाम जांच के बावजूद कहीं कोई कमी नजर नहीं आती, और चुनाव खर्च सीमा की पाबंदी को अंगूठा दिखा दिया जाता है।