
प्रदीप शर्मा, सीनियर जर्नलिस्ट
कहानी दोनों की अलग है, मगर एक चीज़ काॅमन है और है वो प्यार। मगर इसमें भी ढेर सारे विभेद हैं और सबका अपना-अपना ख्याल।
इन दिनों मीडिया की हाटलाइन में जिन दो महिलाओं के नाम शुमार हैं, उनमें एक सीमा हैदर यानी सीमा ठाकुर और दूसरी अंजू उर्फ फातिमा बेगम विशेष चर्चित हैं।
– ये न तो बालीवुड सेलीब्रिटी हैं।
– न किसी राजनेता की संतति।
– न ये कोई खरबपति परिवार से हैं। मगर इन्होंने मीडिया जगत की चर्चा में बड़ी-बड़ी हस्तियों को पीछे छोड़ दिया है।
: कहानी दोनों की अलग है, अपने प्यार की खातिर सीमा 3-4 बच्चों को साथ लेकर दुबई, नेपाल होकर बच्चों के साथ पैदल चलते हिंदुस्तान में आ जाती है।
मगर सीमा ठाकुर उर्फ सीमा हैदर यहां कौतुक हैं।
कितनी विचित्र बात है। विदेशियों से विवाह के बाद उन्हें मान्य कर लिया जाता है। मगर पाकिस्तान से वीजा न मिलने के कारण
महिला आई है, तो शक की सुई घूम गई।
# मेरा मानना है कि प्यार की खातिर दुबई और वहां से नेपाल होकर पैदल अपने बच्चों के साथ यहां आ गई। यहां क्या हुआ कुछ हल्की शोहरत (मीडिया) और क्या मिला। रोज ढेर सारे मीडिया के आने पर खातिरदारी में ही उसके पास का पैसा खत्म हो गया। जबकि वह हिंदुस्तान की कसमें खा रही।…… (आगे पढ़ें )
इधर भारत की अंजू ने भी पाकिस्तान के एक खूबसूरत और संपन्न नौजवान से नजरें लड़ा ली, और वह विधिवत वीज़ा लेकर सीधे बाउंड्री पारकर अपने हमसफर से मिलने चली गई।
कितना फर्क है … अंजु को पाकिस्तान सरकार ने हाथोंहाथ वीजा दे दिया। इसके बाद इसकी अवधि पहले छह माह और बाद में 12 माह तक बढ़ाने की प्रोसेस शुरू हो गई । वहां उसे बड़े रईस घराने ने जमीन देदी तथा बड़ी राशि का चेक भी दिया ।
वहीं दूसरी ओर भारतवर्ष में सीमा के साथ क्या हुआ। यहां न तो उसे वीजा मिला और न कोई बड़ा गिफ्ट। सोशल मीडिया पर पाकिस्तान वाली भाभी कहकर भी खूब पोस्ट हुए। लगातार मीडिया ट्रायल के लिए आ रहे चाहे-अनचाहे मेहमानों की खातिरदारी में पास का पैसा तो खर्च हो ही गया साथ में उसके परिवार का काम-धंधा भी चौपट हुआ सो अलग।
कुछ सरकारी एजेंसी अवैध रूप से भारत में प्रवेश का मुद्दा बनाकर प्रकरण दर्ज करने की तैयारी में है। कुछ को संदेह है कि सीमा कहीं पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की एजेंट तो नहीं, वगैरह-वगैरह।
हमारा मानना है कि यदि सीमा ठाकुर (हैदर) पाकिस्तानी एजेंसी की एजेंट होती तो उसके लिए भारतीय वीज़ा-पासपोर्ट बनवाना कोई बड़ी बात नहीं थी। यदि वह आईएसआई एजेंट होती तो उसके यहां होने की खबर इस कदर आम भी नहीं हो पाती और वह अपने टास्क को अंजाम देकर कब की फुर्र हो जाती। बहरहाल यह अच्छी बात है कि अभी तक जांच एजेंसियों ने उससे तमाम पूछताछ के बाद अभी तक ऐसे किसी इल्ज़ाम की पुष्टि नहीं की है।
इधर दुश्मन देश से भारत आई महिला को डरते-सहमते कुछ लोगों ने मदद करना भी चाहा तो उसका विरोध करने वाले कई खड़े हो गए।
हमारा मानना है कि सीमा को यहां एक अच्छे मेहमान की तरह रखा जाए। हमारी सांस्कृतिक विरासत भी कहती है कि शरणागत की रक्षा करें। इस प्यार को प्यार ही रहनें दें कोई नाम न दें।
