May 18, 2026 |

जब दुर्घटना की आग में सब रोटी सेंक रहे

तब याद करें उस काले दिन से सरकारी अमले की जनसेवा कहानी

Hriday Bhoomi 24

प्रदीप शर्मा संपादक हृदयभूमि हरदा.

हो सकता है कि कुछ लोग इस स्टोरी को लेकर ट्रोल करने लगें/ मगर सच कहीं भी हो, काला या सफेद उसे कभी झुठलाया नहीं जा सकता, लिखा गया हर शब्द सच होने से अमिट रहेगा। तो बात करते हैं मध्यप्रदेश के उस शहर की जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हृदयनगर कहकर पुकारा/ आज यहां  दैव-दुर्योग से ऐसा क्या ऐसा हुआ कि निर्दोष लोगों को एक बार फिर बड़ी मानव त्रासदी का दंश झेलना पड़ा। इस दुर्दांत और दु:खद घड़ी में वो कौन लोग थे जो घटना की घड़ी में वीडियो बना रहे थे, मगर मदद के लिए शासन-प्रशासन को सूचना नहीं दे पा रहे थे। 

-*क्षमा करना हम यहां बात कर रहे हैं 6 फरवरी 2024 को हरदा के समीप स्थित ग्राम बैरागढ़ में फटाका फैक्ट्री के महाविस्फोट की, जहां घटना के बाद इन 5-6 दिनों में भी यह पता नहीं लगा कि वहां काम करने वाले कितने मजदूर थे। वे शहरी थे या ग्रामीण अथवा बाहर से बुलाए गए कारीगर। किसी का भी कोई अधिकृत रिकॉर्ड नहीं मिला। श्रम विभाग के रजिस्टर भी मौन क्यों हैं जो वहां काम करने वालों की सूचना नहीं दे रहे। कहां चले गए ये सब। वैसे यह रिकॉर्ड तो उन हंगामाखेज लोगों के पास तो होगा ही। आपको बता दें कि -👇*

– बैरागढ़ के इस बारूद ब्लास्ट ने मानवीय दृष्टि से संपूर्ण प्रदेश को हिला दिया है। आसपास से जो सूचनाएं मिली, उससे पता चलता है कि हरदा से 70-80 किलोमीटर दूर शिवपुर और बैतूल जिले की बार्डर तक इसकी गूंज सुनी गई। वहीं बैरागढ़ के समीप 10 किलोमीटर के दायरे में फटाका गोदाम के पत्थर, पिलर्स और अन्य मटेरियल फिकाए, जिससे मगरधा रोड पर घायल हुए लोग इलाज करा रहे हैं। हैरानी की बात यह कि आग में झुलसे कम लोग ही अस्पताल आए। क्या हुआ इस हृदयभूमि को जहां लापता लोगों की शिकायत करने कोई भी आगे नहीं आया।

(*इसकी सूक्ष्म तहकीकात की जानी बाकी है।)

– चलिए जनहानि और संपत्ति नुकसानी के आंकड़े धीरे-धीरे आते रहेंगे। मगर महाविस्फोट की घटना के बाद प्रदेश शासन का जो अमला जनसेवा में लगा है। उसका हाथ न बंटा सकें तो भी ठीक मगर राजनीतिक स्वार्थों की खातिर उस पर आरोप लगाना शुरू हो गया।

– याद करें घटना के बाद जब लोग दौड़-भाग कर रहे थे तब उनकी मदद करने कौन आगे आया था। हमारे प्रशासनिक अमले का वही छोटा कर्मचारी और पुलिस जवानों ने भूखे-प्यासे रहकर इन 5-6 दिनों में घर पर ढंग से रोटी नहीं खाई और न ही सुकून की नींद ली। वहीं प्रशासन के अधिकारियों ने हर मिनिट-हर पल तमाम सूचनाओं पर सजग रह तत्काल कार्य के निर्देश दिए। यहां याद करें जिले में अमला कम होने से मैदानी कार्य करने पड़ोसी जिलों से पुलिस की मदद बुलाई गई। हमारे स्वास्थ्य अमले ने भी कोरोना काल में की गई दिनरात सेवाओं को याद दिला दिया।

संकट की इस घड़ी में काम आए उस सरकारी कर्मचारी को कोसें नहीं बल्कि शाबाशी का इनाम तो दें कि आज यह न होते तो बड़े धमाकों के बाद बैरागढ़ में हिरोशिमा या नागाशाकी का दृश्य जरूर बन जाता।

– तो देखना मित्रों हृदयभूमि24 पर

सोमवार से शासकीय अमले के परिश्रम का यह खबर सीरियल👇

फिर चाहें तो ट्रोलिंग करना मगर हम उन कर्मवीरों की कहानी और योगदान का ज़िक्र करेंगे जिन पर निगाहें नहीं गई। इस बारे में हमें हर वह सूचना दें उनकी कहानी की जो जनसेवा के इस महायज्ञ में अनदेखे रह गए। आएं और अवश्य बताएं

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संकट के इस दिन कौन आया था

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हम बताएंगे वह सब जिन्हें याद करना चाहिए।

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