
हृदयभूमि, हरदा।
सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र नेमावर में विगत चार माह से चातुर्मास कर रहे निर्यापक मुनि श्री वीरसागर जी महाराज का ससंघ संयमोत्सव पिच्छी परिवर्तन समारोह आज रविवार को क्षेत्र के पंच बालयति जिनालय परिसर में सानंद सपन्न हुआ। उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुनिश्री वीरसागरजी महाराज ने कहा कि पिच्छीका संयम का प्रतीक है जो संयम धारण कर सकता है वहीं पिच्छीका लेने का पात्र है। पिच्छीका लेना एक बहुत कठिन कार्य है जो संयम का अनुसरण कर धर्म के मार्ग पर संयम पूर्वक चल सके वहीं पिच्छीका धारण करने का अधिकारी है। यदि हम दुखों से मुक्ति पाना चाहते है तो हमें प्रभु की शरण में चले जाना चाहिए ।
आज के आयोजन में पिच्छीका का अनावरण भी अद्भुत बन गया जिसमें पिच्छीका को अनेकों आवरणों में लपेटा गया था जिसे ब्रह्मचारिणी बहनों ने मंच पर पहुंचाया ओर चातुर्मास के दौरान सहयोगी रहे सदस्यों, पूर्व के चातुर्मास में पिच्छीका लेने एवं देने वाले श्रावक श्राविकाओं, ट्रस्ट कमेटी, वरिष्ठ समाजजनों, ब्रह्मचारी भैय्याजी द्वारा एक एक आवरण उतार कर अनावरण किया।
मुनिश्री वीरसागरजी महाराज को नवीन पिच्छीका देने का सौभाग्य हरदा नगर के युवा श्रावक राहुल गंगवाल एवं मुनिश्री की पुरानी पिच्छीका लेने का सौभाग्य श्रावक आलोक बड़जात्या को प्राप्त हुआ। पिच्छीका लेने ओर देने वाले नामों की घोषणा होते ही होने लगी जय जयकार, परिसर मुनिश्री ओर हरदा के नारों से गुंजायमान हो गया । उपस्थित जनसमुदाय ने राहुल गंगवाल ओर आलोक बड़जात्या को बधाइयां देते हुए करतल ध्वनि से अभिनंदन किया। आज सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र में हरदा, खातेगांव, टिमरनी, बानापुरा, अजनास, खिरकिया के साथ ही बड़ी संख्या में पुना, मुम्बई, आगरा, इंदौर आदि स्थानों के श्रृद्धालुओं ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर सहभागिता कि ओर भव्य पिच्छीका परिवर्तन समारोह के साक्षी बने।
आयोजन में खातेगांव पाठशाला परिवार के बच्चों ने अपनी नाट्य प्रस्तुति से भव्यता दी।