प्रदीप शर्मा संपादक हृदयभूमि।
आज से 40 साल पूर्व मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ क्षेत्र में एक विदेशी कंपनी यूनियन कार्बाइड में हुए गैस रिसाव की घटना शायद नई पीढ़ी को याद न हो। मगर तब हुई इस भीषण गैस त्रासदी में कहां, किस, किसके साथ क्या हुआ इसकी समूची कहानी अभी भी अनेक लोगों को शायद पता न हो।
कौन कहां गया, किसको पता –
ठीक उसी तरह यूनियन कर्बाईड के मालिक या संचालक वारेन हेस्टिंग्स जैसे अचानक आकाश मार्ग से वे लापता हो गए थे। फर्क सिर्फ इतना था कि गैस से पीड़ितों को या तो मौत मिली, अथवा वे स्वयं घिसटकर या किसी तरह अपने साधनों या मार्गों से भाग निकले। बस इसमें यह पता न चला कि कौन कहां गया। इसकी गहराई में जाते हुए मुझे अपने मुल्क की कहानी बयां करना है।
मौत के तांडव का वो मंजर-
इस भयावह दुर्घटना वाली रात मैं अपने मित्र राजेश मिश्रा (वर्तमान में होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा तहसील में एक नामी अधिवक्ता) के साथ भोपाल में बुधवारिया चौक के समीप स्थित गिन्नोरी बगिया स्थित मंदिर प्रांगण में था। मध्य रात्रि कारखाने से अचानक गैस रिसते ही वहां एक के बाद एक सैकड़ों लोगों की भीड़ दौड़ कर वहां तक आ पहुंची जहां हम विश्राम कर रहे थे।
तब शायद पानी ने बचाया
उस रोज एक-एक कर अमानक सैकड़ों से अधिक बदहवाश में लोग दौड़ते हुए उसी गिन्नौरी में आधी रात को आ गए। और हमें बिस्तर छोड़कर उठते हुए पूछना पड़ा। तब उन्होंने बताया कि पानी की झील के पास गैस अप्रभावी हो सकती है। इसमें अनेक लोग गायत्री मंत्र और अनेक अपने-अपने धर्म के मंत्रों का जाप कर रहे थे।
उस मनहूस तारीख को भोगा-
मैं एक पत्रकार हूं मगर मेरा मित्र जो वर्तमान में अधिवक्ता है राजेश कुमार मिश्रा से पूछें किस तरह हम ट्रेनों में मुश्किल भराकर सिवनी मालवा तक आए थे। तब की दास्तां किसनी है जानी।
–एक दिन बाद ?
रात्रि में अचानक मुझ पर भी कोई दौर आ गया। तब मुझे देखने के लिए महेंद्र सिन्हा के साथ आनंद रघुवंशी और महेंद्र जी की बहन शीला भी आईं। इन सबके आने से शायद मैं बच गया।
मगर गैस का असर अभी खत्म नहीं हुआ है।