#बैंबू क्राॅफ्ट : हरदा की महिलाओं द्वारा तैयार बांस की कारीगरी ने धूम मचाई
बांस की क्राॅफ्ट सामग्रियों की बढ़ रही मांग

राजकमल धार्मिक, हरदा।
स्थानीय महिला कारीगरों द्वारा निर्मित बांस क्राफ्ट सामग्री ने न केवल स्थानीय बाजार में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशेष पहचान बनाई है। इनकी कला ने देश भर में लोगों का दिल जीत लिया है। आज यहां बांस से बनी हस्तशिल्प वस्तुएं अब अधिक से अधिक मांग में हैं।

बांस के लोकप्रिय उत्पाद-
जिले की महिला कारीगरों द्वारा तैयार की गई बांस क्राफ्ट सामग्री, जैसे कि बांस की घड़ियां, ज्वेलरी, सजावट के सामान, और अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद, खास तौर पर इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन कारीगरों की मेहनत और हुनर को देखकर न सिर्फ स्थानीय समुदाय, बल्कि विभिन्न उद्योगों और बाजारों से भी सराहना मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने सराहा –
इन महिलाओं द्वारा निर्मित कारीगरी की गुणवत्ता और सुंदरता की अत्यधिक सराहना की जा रही है। स्थानीय बाजारों से लेकर बड़े मेले और प्रदर्शनियों तक, हर जगह इन बांस उत्पादों की भारी मांग देखी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस कला की सराहना कर स्थानीय कारीगरों के योगदान को प्रोत्साहित किया है।
महिलाओं का आर्थिक संबल –
यह कारीगरी हरदा की महिला कारीगरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। इसके साथ ही, इस क्षेत्र की कला और संस्कृति को एक नई पहचान मिल रही है, जिससे बांस उद्योग को भी नई दिशा मिल रही है।
सफलता में योगदान –
इस सफलता में एमएसएमई मंत्रालय, राष्ट्रीय हस्तशिल्प और हस्तकरघा विकास परिषद (National Council for Handicrafts and Handlooms Development) और सिनर्जी संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सिनर्जी संस्था के सदस्य शिखा जनोरिया, अशोक सेजकर, पंकज बैरागी और संजय कनक ने इस प्रक्रिया में कारीगरों को मार्गदर्शन और समर्थन दिया, जिससे इस कला के विस्तार में मदद मिली और स्थानीय कारीगरों को एक नई दिशा मिली।
मेलों में सराहना –
इसके अलावा Ehsaas the NGO Mela 2025 मुंबई में आयोजित एनजीओ मेले में भी इन महिला कारीगरों की कारीगरी को खूब सराहा गया। इस मेला का आयोजन DOCC और SPJIMR के सहयोग से किया गया था, जहां हरदा के बांस उत्पादों ने एक बार फिर अपनी विशिष्टता और गुणवत्ता का प्रदर्शन किया, जिससे इन कारीगरों की कला को और भी अधिक मान्यता मिली।
