
प्रदीप शर्मा संपादक हृदयभूमि।
मित्रों खेल को खेल ही रहने दो कोई नाम न दो। बस यही निवेदन है उन सभी लोगों से जो न तो खेलते हैं, और न ही इसके नियमों को जानते हैं। मगर किसी मैच या स्पर्द्धा में हार मिल जाए तो हर खिलाड़ी की फजीहत करने से नहीं चूकते।
यहां हम चर्चा कर रहे हैं भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा की। जिन्हें किसी मैच में हार मिलने पर मैदान और इसके बाहर भी ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा। जबकि यही बंदा टीम के साथ देश के लिए सुनहरा वर्ल्ड कप लेकर आया है। हम यहां रोहित की तुलना महान खिलाड़ियों से नहीं कर रहे, मगर छोड़ी गई विरासत पर इस बंदे ने टीम की कमान बखूबी संभाली।
रोहित शर्मा इस टीम में तब आए थे जब नए-नवेले और भावी महान कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कमान संभाली थी। इस घड़ी में टीम के बड़े सितारों ने विश्राम ले लिया था, और महान क्रिकेटरों की अनुपस्थिति में दुनिया का पहला टी-20 विश्वकप एकतरफा जीतकर देश का मान बढ़ाया था।
तब उसी टीम में एक तेज-तर्रार ओपनिंग बैट्समैन आया था, याद है वह नया खिलाड़ी रोहित शर्मा था। जिसे तमाम रिकार्ड के बाद भी कभी याद नहीं किया जाता था।
हम बात कर रहे हैं उसी नौजवान रोहित शर्मा की जिसने कालांतर में बड़ी से बड़ी पारियां खेलकर विजयश्री दिलाई और कालांतर में धोनी की विरासत को टीम के कप्तान के रूप में खूब संभाला।
यह वही रोहित शर्मा है जिसने बाद में ‘आईपीएल’ के टूर्नामेंट में अपने गुरू रहे कप्तान की टीम को मुंबई की ओर से कड़ी चुनौती दी। और टूर्नामेंट भी जीते।
यह रोहित ही थे कि अपनी टीम के महान कोच राहुल द्रविड़ को सम्मानजनक विदाई देने के लिए हर समय टीम को मोटिवेट करते रहे। इस टी-20 के पहले वाले टूर्नामेंट में लगातार शानदार जीत हासिल करने के बाद फाईनल में एकतरफा हारने का ग़म एक खिलाड़ी ही समझ सकता है।
इसलिए खेल में एक-दो हार के लिए किसी बड़े खिलाड़ी का अपमान न करें, और अब तो सामने बूमराह जैसे खिलाड़ी कमान संभालने को तैयार हैं। इसलिए खिलाड़ियों के जरा से गड़बड़ प्रदर्शन पर उंगली न उठाएं।
क्योंकि कल यही खिलाड़ी मान भी बढ़ाएगा।