
प्रदीप शर्मा संपादक हृदयभूमि।
हरदा के समीप ग्राम बैरागढ़ के पास फटाका फैक्ट्री में ब्लास्ट की घटना कोई ऐसी तो नहीं है कि इसकी सालगिरह मनाकर याद किया जाए। मगर यह धमाका इतना जोरदार अवश्य था कि इसकी गूंज 50 किलोमीटर दायरे में सुनी गई। इसी के साथ प्रदेश के किसी कारखाने में हुए भीषण हादसों के इतिहास में हरदा का नाम भी दर्ज हो गया।

हादसे की वीभत्सता –
मानवीय दृष्टिकोण से यह भीषण हादसा इतना गंभीर था कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर एकाॅउंट पर पोस्ट लिखकर पीड़ितों के साथ अपनी संवेदना जताई। इसके साथ ही केंद्र व राज्य सरकार की एजेंसियों ने मोर्चा संभालकर मदद करने के उपाय शुरू कर दिए। यहां भेजे गए कलेक्टर आदित्य सिंह और एसपी अभिनव चौकसे ने हर स्तर पर मोर्चा संभाला। वहीं समाजसेवियों ने भी मदद का हाथ आगे बढ़ाया। शासन-प्रशासन की मदद से पीड़ित परिवारों को पंचायत भवन, सिविल लाइन पुलिस के पुराने भवन व अन्य स्थानों पर ठहराकर रहने और भोजन की नियमित व्यवस्था जुटाई।

घटना की वीभत्सता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आग बुझाने के लिए आसपास के सभी जिलों से आए फायर ब्रिगेड एक सप्ताह तक निरन्तर जुटे रहे। वहीं फैक्ट्री से टूटकर उड़े कारखाने के बड़े-बड़े पत्थर 12 किलोमीटर दूर बैरागढ़ तक आए। यहां रहने वाले दर्जनों मजदूर परिवारों के घर-मकान भी तबाह हो गए।
पटरी पर लौटती जिंदगी –
मगर जिला प्रशासन, समाजसेवी नागरिकों के प्रयासों से ब्लास्ट पीड़ित परिवारों की जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। जब इस दुर्घटना को लेकर राजनीति का भी बाजार गर्म था, तब युकां महिला नेत्री अवनी बंसल ने एनजीटी में याचिका डालकर पीड़ितों को बड़ी आर्थिक मदद दिलाने का एकला प्रयास किया। इसके परिणामस्वरूप फैक्ट्री मालिक की नीलाम संपत्ति से 15-15 लाख मिलने के प्रयास हुए।
मगर अब क्या? –
बैरागढ़ की फटाका इस फैक्ट्री में ब्लास्ट की सालगिरह पर संभव हैै कि कई नेताजी आएं और तमाम बातेंं तमाम बातें करें मगर यह दुर्घटना अपने पीछे अनेक जीवंत सवाल छोड़ गई है।
1- फटाका फैक्ट्री की लगातार मानिटरिंग के बावजूद वहां इतनी बड़ी तादाद में बारूद का भंडारण किसकी गलती से हुआ।
2- क्या भविष्य में ऐसी बड़ी दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है?
3- राजेश अग्रवाल व सोमेश अग्रवाल का यह कारखाना मध्यप्रदेश में दूसरे नंबर पर माना जाता है। इससे जुड़े सैकड़ों परिवार अब रोजगार विहीन हो गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल –
इन दिनों जब हर प्रदेश के मुख्यमंत्री अपने यहां रोजगार लाने के लिए बड़े-बड़े उद्योगपतियों को न्यौता देते घूम रहे हैं। तब फेक्ट्री में ब्लास्ट की घटना बाद राजू अग्रवाल और सोमेश अग्रवाल तो अपने धनबल से केस लड़ लेंगे या उनका जो भी होगा मगर क्या ऐसी बड़ी त्रासदी के बाद क्या यहां कोई बड़ा उद्योगपति आकर लोगों को रोजगार देना चाहेगा। याद रहे दुनिया के हर कल कारखानों में ऐसी घटनाएं होती आई हैं। हमें इन्हें रोकने की कवायद पर ध्यान देना है।