#जमाने में टूटते रिश्ते : क्या है संगीन हत्याओं की असल वजह
रिश्तों को बनाने और निभाने में चूक से हो रहे लोमहर्षक हत्याकांड

प्रदीप शर्मा, संपादक।
भूल जाएं वो पुरानी बातें जब सास-ससुर और पति मिलकर नवविवाहिता की हत्या कर शव को कहीं छिपा देते थे/नई दिल्ली का वह कांड भी काफी पुराना हो गया है जिसमें एक पति ने पत्नी के टुकड़े-टुकड़े कर पन्नियों में लपेट कर फ्रिज में रख दिया था। ताकि वह जल्द खराब न हो और धीरे-धीरे उन टुकड़ों को अलग-अलग जगह दफन कर सके।
-ये सारे मामले अब काफी पुराने हो चुके है, और कुछ तो लोगों के स्मृतिपटल से दूर भी हो गए। अब एक ऐसा जमाना आ गया है, जहां छोटी-छोटी बातों पर पत्नियां पति की हत्या कर उसे ड्रम या अन्य सामग्री में पैक कर छिपा देती है। इस दौरान 13 दिनों की गमी तो दूर वह अपने यार के साथ गुलछर्रे भी उड़ाती है। यहां हम महिलाओं के स्वभाव और उनके चरित्र पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, लेकिन बदलते जमाने की फितरत पर चर्चा अवश्य कर रहे हैं। ऐसे वीभत्स कांड चाहे महिला करे या पुरुष है तो चिंताजनक।
ऐसे बदलाव हमारे मानव स्वभाव में क्यों आ रहे हैं। बस चिंता का विषय सिर्फ यही है।
-हाल ही हुए मेरठ, औरैया और बेंगलुरु में विवाह के बाद पत्नियों ने जिस तरह क्रूरतापूर्वक आपने पति की हत्या कर दी वह काफी विचारणीय है। जिसे अभी तक साहित्य जगत में कोमलांगा और सुकोमल कहा गया है उसके स्वभाव में अचानक इतना बड़ा परिवर्तन कैसे आ गया यह विचारणीय है।
समाजशास्त्रियों की चिंता क्या होंगे कारण-
-इन घटनाओं के बीच क्या कारण हो सकते हैं यह उनके पारिवारिक और तमाम परिस्थितियों पर निर्भर है। किंतु समाजशास्त्र के चिंतकों का मानना है कि लड़के और लड़की के विवाह समय हुई अनेक चूक भी प्रमुख है।
-क्योंकि अब यह वो जमाना नहीं रहा कि परिवार द्वारा थोपे गए रिश्तों को बेटी या बहु निभाती चले।
-इन मामलों में जो बातें सामने आईं हैं उसमें खास है-पति-पत्नी में जबर्दस्त संवादहीनता, वर्तमान समय में सोशल मीडिया व गलत संगती का असर प्रभाव, शादी से पहले लड़की की सहमति न लेना, पति की आर्थिक स्थिति से असंतुष्टि इत्यादि।
इसलिए माना जा रहा है कि अब ऐसे विवाह जो सामाजिक स्तर पर हों या व्यक्तिगत प्रेम विवाह, लंबे समय तक चलने वाले इन रिश्तों को निभाने के लिए आपस की पूरी जानकारी लेने के साथ वर-वधु के बीच आपसी सहमति होना जरूरी है। अन्यथा जरा-जरा सी बात पर आई रिश्तों में खटाई कभी भी बड़ा रूप ले सकती है। यहां और भी बड़े कारण होंगे मगर फिलहाल इतना ही…
