April 18, 2026 |

गुलजार एक ऐसा पारस जो हर पत्थर को कंचन बना गया

लेखकीय और शायरी का महान करिश्मा थे शायर गुलजार

Hriday Bhoomi 24

प्रदीप शर्मा हृदयभूमि हरदा*

हाल ही सुप्रसिद्ध गायिका श्रीमती आशा भोसले के देहांत के साथ पूरा बालीवुड फिल्म जगत अपनी पुरानी विरासत से वंचित हो गया है/ जिसके साथ यह जगत सदैव याद किया जाता था।

इसी के साथ ही हमें याद आएंगे वह निर्देशक, कलाकार, संगीतज्ञ, गायक और वह गीतकार भी जो आज हमारे बीच नहीं हैं।
-एक ऐसे ही शायर, रचनाकार व फिल्म निर्देशक को याद करना चाहता हूं जो अब हमारे बीच नहीं है।
-आशा जी भोसले का ज़िक्र करने के पीछे मेरा मकसद सिर्फ यह बताना है कि यदि पारस के संपर्क में आ जाएं तो पत्थर भी कंचन बन जाए।
-जब आशा जी जीवन में संघर्ष कर रहीं थीं तब नई धुनों के रचनाकार आरडी बर्मन साहब ने एक नए अंदाज में गाने का रास्ता दिखाकर इंडस्ट्री में उन्हें नया मुकाम दिया। इससे आशा जी को एक गायिका की पहचान के साथ जगह तो मिली मगर उन्हें अपनी बड़ी बहन महान गायिका लता मंगेशकर जैसा स्थान नहीं मिला।
-बस मेरा यही कहना है कि एक चिंतक, लेखक व बड़े शायर गुलजार साहब का भी वही पारस रूप यहीं सामने आया।
-गुलज़ार ने सदैव ही किसी स्टारडम के पीछे भागने के बजाए उन नए कलाकारों पर ध्यान दिया जो प्रतिभा में किसी से कम नहीं थे। इस दौरान उन्होंने इंडस्ट्री में *केब्रा गीत* के लिए पहचानी जा रही गायिका श्रीमती आशा भोसले को अपनी फिल्म इजाजत में स्थान दिया।
-उनकी आवाज में प्रस्तुत यह गीत आज भी टूटे दिलों की ऐसी आवाज बना हुआ है। आशाजी को प्रणाम सहित उनकी गायिकी का यह महान नगमा… जिसे हर व्यक्ति एकांत में हर समय सुनना चाहे।
एक बार आप भी सुनना –

*मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है*
*फिल्म-इजाजत*
*गायिका आशा भोसले*


Hriday Bhoomi 24

हमारी एंड्राइड न्यूज़ एप्प डाउनलोड करें

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Verified by MonsterInsights