हरदा। कहावत है कि पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब। मगर हिंदुस्तान के प्रजातंत्र की बात इसके ठीक उलट है। यहां कम पढ़े-लिखे या यूं कहें कि अनपढ़ों को भी चुनाव जीतकर राजनीति में बड़े ओहदों पर काम करने का मौका मिल जाता है। मगर यह हरदा जिले का सौभाग्य है कि बीते अनेक वर्षों से जिले की दोनों विधानसभा सीटों पर पढ़े-लिखे और ज्ञानवान लोगों के चुनाव लड़ने और जीतने का मौका मिला है।

हरदा विधानसभा सीट पर ही जो दो प्रमुख प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें भाजपा के कमल पटेल इंदौर में रहकर उच्च अध्ययन कर स्नातक हैं।

वहीं कांग्रेस के नेता डाॅ. रामकिशोर दोगने भी उच्च शिक्षित होने के साथ डाॅक्टरेट की उपाधि से विभूषित हैं।


इधर टिमरनी में भी भाजपा से मकड़ाई घराने के कुं. संजय शाह व कांग्रेस से मैदान में उतरे मकड़ाई परिवार के युवराज अभिजीत शाह भी उच्चशिक्षित प्रत्याशी हैं।

वहीं जयश के रमेश मर्सकोले तो शासकीय सेवा को बीच में छोड़कर समाजसेवार्थ राजनीति के मैदान में उतरे हैं। जाहिर है जिले से विजयी होने वाले प्रत्याशी चाहे किसी भी दल के हों उन्हें शिक्षा और ज्ञान के मामले में कमतर नहीं आंका जा सकता।
मगर जनसेवा के क्षेत्र में राजनीति का क्षेत्र कितना ही बड़ा क्यों न हो इसे फतह करने उपयोग की जाने वाली साम, दाम, दंड और भेद की नीतियों के कारण इसे वह सम्मान नहीं मिल पाता जिसकी कि यह हकदार है। बहरहाल सापसुथरी छवि वाले इन सभी नेताओं से उम्मीदें हैं कि उनके कार्यकाल में राजनीति को उच्च सम्मान मिलेगा।