June 2, 2026 |

नर्सिंग होम और डाक्टर पर प्रकरण क्यों नहीं बना – हाईकोर्ट

उच्च न्यायालय ने एसपी और सीएमएचओ से हलफनामा मांगा

Hriday Bhoomi 24

हरदा। स्थानीय निजी नर्सिंग होम में वर्ष 2020 हुए नवजात की गर्दन काटकर हत्या के मामले में 30 अक्टूबर को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई में कोर्ट  ने पुलिस की कार्यवाही पर नाराजी जताई। कोर्ट ने पूछा कि मामले में डाॅ. मनीष शर्मा, भगवती नर्सिंग होम एवं संबंधित डाॅक्टरों को आरोपी क्यों नहीं बनाया। कोर्ट ने इस बारे में हरदा एसपी को हलफनामा दायर करने के आदेश दिये हैं। जानकारी के अनुसार नर्सिंग होम में वर्ष 2020 में एक बलात्कार पीड़िता नाबालिग से उत्पन्न नवजात की हत्या गर्दन काटकर हुई थी। अधिवक्ता अनिल जाट ने बताया कि जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई दौरान न्यायाधीश ने पुलिस कार्यवाही पर नाराजी जताकर कहा कि डाॅक्टर मनीष शर्मा एवं संबंधित अस्पताल एवं संबंधित अन्य डाॅक्टरों को आरोपी क्यों नहीं बनाया। इस बारे में हरदा पुलिस अधीक्षक अपना जबाव हलफनामे के साथ पेश करें।

उच्च न्यायालय ने 22 मई 2020 को डाॅक्टर मनीष शर्मा को आरोपी न बनाने के संबंध में गठित मेडिकल बोर्ड पर भी गहरी नाराजी जताई। साथ ही पीड़ित पक्षकार को यह कहा कि वह मेडिकल बोर्ड के जो सदस्य डाॅ. शिरिष रघुवंशी, डाॅ. राजेश सिसोदिया, डाॅ. गोविंद कुशवाह थे उन्हें भी इस याचिका में पक्षकार बनाये के लिये तीन दिन में कार्यवाही करें।

अधिवक्ता अनिल जाट ने बताया कि उच्च न्यायालय की सुनवाई दौरान सीबीआई के काउंसिल को एमीकस क्यूरी बनाने के लिये कहा है एवं न्यायमूर्ति द्वारा सीबीआई काउंसिल से कल की सुनवाई के दौरान यह भी पूछा कि क्या माईनर एबार्सन हो सकता है? इस पर सीबीआई कौंसिल ने कहा कि माईनर का एबार्सन पीसी-एंड-पीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन है।
न्यायमूर्ति द्वारा इस प्रकरण की सुनवाई दौरान सीएमएचओ हरदा को भी इस बात का जबाव हलफनामे से देना है कि प्रकरण में किस प्रकार से पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन नहीं हुआ। संबंधित डाॅक्टरों पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई। श्री जाट ने बताया है कि प्रकरण में अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी। न्यायमूर्ति द्वारा प्रकरण को 30 नवंबर 23 को ‘टाॅप आफ द लिस्ट’ के रुप में नियत किया है।
इस प्रकरण को यहां तक पहुंचाने में जयश प्रदेश अध्यक्ष रामदेव काकोडिया की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। रामदेव काकोडिया द्वारा इस प्रकरण की पीडिता को न्याय दिलाने के लिये अधिवक्ता अनिल जाट के पास लाया गया था। अधिवक्ता अनिल जाट के द्वारा इस प्रकरण के संबंध में हरदा न्यायालय में पैरवी की गई। उच्च न्यायालय के समक्ष इसकी पैरवी अधिवक्ता अंकित सक्सेना कर रहे हैं।


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