June 10, 2026 |

क्या हार में, और क्या जीत में…

संघर्ष के दिनों में याद करते थे अटल जी यह कविता

Hriday Bhoomi 24

प्रदीप शर्मा संपादक

मध्यप्रदेश में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति एवं बड़े साहित्यकार डाॅ. शिवमंगल सिंह सुमन की इस कविता ने नेताओं को धैर्य और साहस की सीख दी है। भाजपा के बड़े नेता अटल बिहारी वाजपेयी अक्सर इस कविता को याद करते थे –

“क्या हार में और क्या जीत मैं

भयभीत नहीं बिल्कुल मैं,

ये हार एक विराम है,

और ये जिंदगी महासंग्राम है।”

-वर्तमान परिदृश्य में चुनावी हार झेल चुके प्रदेश के कद्दावर नेताओं के लिए यह कविता अवश्य फिर कोई नई ताकत देकर आगे बढ़ने की ऊर्जा प्रदान करेगी।


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