हाय! गरीबी ऐसी कि सिस्टम भी शर्म से गड़ जाए
पत्नी का इलाज कराने अस्पताल ले जाने हेतु आटोरिक्शा के भी पैसे नहीं

प्रदीप शर्मा संपादक
इटारसी। आज के इस जमाने में जब दुनिया पैसों की खनकार पर चलती हो तब ऐसी भी गरीबी हमारे आसपास मिल जाती है कि इसे देखकर समाज का पूरा सिस्टम भी शर्म से गड़ जाए।
गरीबों के हित की बात कर सत्ता के उच्च ठिकानों पर जाने वाले जनप्रतिनिधियों और शासन की योजनाओं को गरीब तक पहुंचाने के ठेकेदार नौकरशाहों के लिए इससे अधिक शर्मनाक और क्या हो सकता है कि बीमार पत्नी का इलाज कराने अस्पताल ले जाने के गरीब के पास आटोरिक्शा के भी पैसे नहीं हों। शासन की सारी कल्याणकारी योजनाएं तब ढकोसला बन जाती हैं, जब दिहाड़ी ठेला लगाने वाला गरीब इतना भी नहीं कमा पाता कि वह पत्नी का इलाज कराने एक आटोरिक्शा का किराया दे पाए
ऐसा ही एक दहलाने वाला चित्र हमें मिला है। जिसमें दिखाई दे सज्जन इटारसी के श्री घनश्याम भाई हैं। इनके हालात पर ज्यादा कुछ न लिखते हुए बस इतना बताना काफी है कि इस हाथ ठेले पर बैठी महिला और कोई नहीं बल्कि उनकी पत्नी श्रीमती सुशीला बाई हैं। श्री घनश्याम के पास इतना पैसा भी नहीं है कि वह बीमार पत्नी का इलाज कराने उन्हें ऑटो करके अस्पताल ले जाए। शहर में वे जिस हाथ ठेले पर फल बेचकर किसी तरह अपने परिवार का गुजर-बसर करते हैं, आज उन्हें पत्नी का इलाज कराने उसी हाथ ठेले पर ले जाना पड़ा।
व्यवस्था का यह हाल देखकर लगता है कि हमारे समाज और व्यवस्था का संपूर्ण सिस्टम इतना गरीब हो गया है कि यह गरीबों की पीड़ा देखकर जरा भी नहीं पिघलता।
यहां बता दें कि सड़क किनारे ठेला लगाकर कमाने वाले श्री घनश्याम का कामकाज इसलिए नहीं चल पाता क्योंकि सरकारी अमला उनको कहीं भी ठेला लगाने नहीं देता। वह जैसे तैसे अपना और अपने परिवार का जीवन चला रहे हैं। इनकी गरीबी के संबंध में नागरिकों को सोचना चाहिए। बताते हैं कि गरीबी की पीड़ा भोग रहे ये घनश्याम जी इटारसी के वार्ड क्रमांक 23 में निवास करते हैं।
इस खबर का मकसद सोए हुए समाज और सरकार को जगाकर किसी गरीब परिवार की मदद कराना है। इटारसी सोशल मीडिया से मिली यह दुखद जानकारी अत्यंत हृदयस्पर्शी है। इसमें नाम और जगह का विभेद भी हो तो हमारा उद्देश्य पीड़ित परिवार को मदद पहुंचाना है।