
हृदयभूमि, हरदा।
आज की इस पहली पोस्ट में आप सभी महानुभाव सोचेंगे कि हम कौन प्रकाश गुरू की बात कर रहे हैं। तो यहां मैं साफ बता दूं कि प्रकाश का अर्थ ही ज्ञान होता है। बहरहाल हम चर्चा करेंगे अपने परम मित्र प्रकाश चंद्र जी वशिष्ठ की जो अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से मित्रों के दिलों पर बेहिसाब राज करते हैं।
लोकप्रियता का अनुमान लगाना मुश्किल-
हरदा के समाजसेवी नागरिक प्रकाश चंद्र वशिष्ठ गुरू की लोकप्रियता का अनुमान लगाना मुश्किल है, क्योंकि वे न कोई राजनेता हैं,और न ही किसी दल में बड़े पदाधिकारी। फिर भी वे अपने समर्थकों के दिलों पर राज करते हैं तो उनके व्यक्तित्व में कोई ऐसी बात जरूर है निराली। आज 9 नवंबर को गोलापुरा स्थित निज निवास पर अपना जन्मदिन मना रहे प्रकाश गुरू के समर्थकों और साथियों ने चौराहों पर फ्लेक्स होर्डिंग लगाकर अपनी खुशियों का इजहार किया है।
कैसे बने सबके गुरू –
शहर के समाजसेवी नागरिक प्रकाश चंद्र वशिष्ठ के नाम के साथ गुरू शब्द तभी से चला आ रहा है जब वे शासकीय स्कूल हरदा में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। उस दौरान उनके काम करने का ढंग इतना निराला था कि वे बिना किसी भय के अपने कर्मचारी साथियों के हकों के लिए हर समय खड़े हो जाते थे। वे जब तक सरकारी सेवा में रहे तब तक कर्मचारी कांग्रेस संगठन में उन्होंने हर महत्वपूर्ण पदों का दायित्व संभाला और हर स्तर पर कर्मचारी हक की आवाज बुलंद की।
निष्ठा छिपाने की चेष्टा नहीं, हर जगह बेबाक –
शासकीय सेवा के इस दौर में भी उन्होंने अपनी राजनीतिक निष्ठा को कभी नहीं छिपाया और वे आजीवन तत्कालीन कांग्रेस नेता स्व. एकनाथ अग्रवाल के साथ इस कदर बने रहे कि श्री अग्रवाल के परलोक गमन बाद श्रद्धांजलिपूर्वक उनकी राजनीतिक विचारधारा और विरासत को खूब संभाला।
बस एक इशारा ही काफी है-
स्व. एकनाथ जी अग्रवाल के बाद वर्ग विशेष में एकमात्र प्रकाश गुरू ऐसी शख्सियत हैं, जिनके इशारे पर राजनीति में उलटफेर होना मुमकिन है। मगर इससे उलट श्री वशिष्ठ ने कभी ऐसा खेल नहीं खेला। उनकी क्षमता का अनुमान लगाकर हरदा विधानसभा क्षेत्र में धक्का खाई भाजपा ने लोकसभा चुनाव में उन्हें पार्टी में शामिल किया।
क्या कहते हैं साथी-
प्रकाश गुरू के समर्थकों और साथियों का ज़िक्र करेंगे तो साथियों की लिस्ट इतनी बड़ी है कि नोटबुक छोटी पड़ जाए। मगर उनके साथी या समर्थक जय प्रकाश त्रिपाठी लालू मुझसे कहते हैं कि “आप गुरू को गुरू ही रहने दीजिए“