बुधनी विधानसभा सीट पर किसका दावा कितना मजबूत
भाजपा के रमाकांत भार्गव के सामने कांग्रेस के राजकुमार पटेल

प्रदीप शर्मा, संपादक हृदयभूमि।
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनावों की तिथि घोषित करने के बाद प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा रिक्त की गई विधानसभा सीट बुधनी पर दोनों ही प्रमुख दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है। इसमें सत्तारूढ़ दल भाजपा की ओर से रमाकांत भार्गव और कांग्रेस से पूर्व मंत्री एवं इस सीट पर भूतपूर्व विधायक रहे पार्टी नेता राजकुमार पटेल को टिकिट दिया है।

किसका दावा कितना मजबूत-
किरार समाज बहुल इस सीट पर श्री पटेल को टिकिट देने से दोनों ही दलों में करारी टक्कर होगी। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री श्री चौहान की यह परंपरागत सीट होने से भाजपा के सामने इसे बचाने का दबाव रहेगा। वैसे रमाकांत भार्गव भी काफी प्रभावशाली नेता हैं। मगर इस बार उन्हें पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती रहेगी। वह इसलिए कि भाजपा ने श्री चौहान के सुपुत्र कार्तिकेय को नजरअंदाज कर उन्हें दावेदारी की पहली होड़ से बाहर कर आए पैनल के आधार पर भार्गव को योग्य माना है।
खांटी कांग्रेसी परिवार –
बहरहाल कांग्रेस के प्रत्याशी राजकुमार पटेल को भी किसी तरह कम नहीं आंका जा सकता है। वे इस सीट पर 1993 में निर्वाचित हुए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के मंत्रीमंडल में एक बार मंत्री पद भी संभाला है। उनकी पुत्रवधु श्रीमती विभा पटेल का भोपाल नगर निगम में मेयर पद पर यादगार कार्यकाल रहा है। पार्टी में यह परिवार खांटी कांग्रेसी के रूप में याद किया जाता है।
निर्वासन भी भोगा –
पार्टी के प्रति समर्पण के बावजूद श्री पटेल ने छह वर्ष तक दल से निर्वासन भी भोगा है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव दौरान विदिशा की लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने भाजपा की बड़ी नेत्री श्रीमती सुषमा स्वराज के विरुद्ध श्री पटेल को टिकिट देकर बड़ा दाव चला था। मगर ऐन मौके पर वे अपने नामांकन पर्चे के साथ पार्टी का बी-फार्म जमा कराने से चूक गए और उनका पर्चा निरस्त हो गया। तब इस बड़ी गलती के लिए दोषी मानकर राजनीतिक स्तर पर उनकी बड़ी बदनामी हुई थी। वहीं कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें छह साल के लिए निलंबित भी कर दिया था। मगर इस काल में भी दल के प्रति उनकी निष्ठा बनी रही
रमाकांत भार्गव की दावेदारी –
इधर भाजपा के प्रत्याशी रमाकांत भार्गव के बारे में कहा जाता है कि एक सरल स्वभाव के नेता हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने विदिशा लोकसभा सीट पर चुनाव जीतकर सफलता हासिल की थी। इसके पूर्व उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा था। उन्हें पार्टी में पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का करीबी माना जाता है। शिवराजसिंह की यह परंपरागत सीट होने से पार्टी उनकी जीत के लिए कोई कमी नहीं छोड़ेगी। यह प्रदेश सरकार के लिए भी अहं सवाल बनी रहेगी। अतः इस सीट पर शिवराज के न होने से यह चुनावी मुकाबला काफी रोचक हो गया है।
