#बांग्लादेश : जहां मैं हिन्दू, जरा भी सुरक्षित नहीं
हरदा में निकली धर्म ध्वजा यात्रा, केवल मानसिक जीवित ही हुए शामिल

प्रदीप शर्मा संपादक हृदयभूमि
यह इबारत सबके सामने मै नीली स्याही में लिख दी है जो भगवान शिवशंकर के कंठ में विराजी है कि कोई भी हिंदू अपने घरेलू कामकाज छोड़कर कभी भी अपना या अपने समाज का अस्तित्व बचाने सामने नहीं आएगा। क्योंकि यह बहुत बड़ी समझदार टाइप की प्रजाति है।
जब भी खटखटाओगे नहीं खुलेगा दरवाजा
बुलाओगे तो बहाना कर शायद कोई न आए –
–भाईयों उम्मीद तो बड़ी थी कि हम एक हैं, मगर इस एक को बचाने कोई खास हिंदू आवाम सामने नहीं आया। यह अलग बात है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं को बचाने की बात करने वाले स्वामी चिन्मयानंद जी को गिरफ्तार कर अज्ञात स्थान पर पीड़ा देने के जतन किए जा रहे हैं। मगर शायद सुप्त हिंदुओं को इससे फर्क नहीं पड़ता।
–फिर भी धन्यवाद उन गिने चुने लोगों का जो इस आव्हान में स्वप्रेरणा से शामिल हुए।
