प्रदीप शर्मा, हरदा/भोपाल।
रोजमर्रा के जीवन में एक कहावत है कि डाल का चूका बंदर और मौके से चूका इंसान कहीं का नहीं रहता। खासकर राजनीतिक जीवन में जिस भी नेता ने मौके को भुना लिया, वह सत्ता के शीर्ष पर जा पहुंचा और जो इसमें चूक गया वह नेपथ्य में चला गया।

बीते दिनों कुछ ऐसा ही हुआ जब एक आयोजन का कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों का अपमान कर पूर्व मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने प्रदेश के मीडिया जगत से पंगा ले लिया, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह स्टेट मीडिया सेंटर का भूमिपूजन कर मीडिया के लाड़ले बन गए।
सीएम यहीं नहीं रुके बल्कि उन्होंने वरिष्ठ पत्रकारों को स्थायी अधिमान्यता, 20 हजार रुपए मानदेय, लघु-मध्यम अखबारों को हर दूसरे माह शासकीय विज्ञापन तथा महिला पत्रकारों को प्रोत्साहन की घोषणा कर बाजी मार गए। इसका आगामी दिनों क्या राजनीतिक असर होगा, यह तो समय के गर्भ में है। मगर अभी तो चौहान ने तीर निशाने पर लगा दिया है।