पुरानी बीमारी का शिकार जयश, इलाज डाॅ. आनंद के पास भी नहीं
टिमरनी में भी दोनों धड़ों के प्रत्याशी आमने-सामने
प्रदीप शर्मा, हरदा।

उम्मीदें तो बहुत थी कि मध्यप्रदेश की मूल आबादी आदिवासी तबके की आवाज उठाने वाला संगठन ‘जय आदिवासी युवा शक्ति’ जयश नए जोश के साथ समाज, देश एवं प्रदेश की व्यवस्था में कुछ परिवर्तन लेकर सामने आएगा। मगर यह भी उसी बीमारी का शिकार हो गया जिसे संगठन के पैरोकार डाॅ. आनंद राय भी शायद अब ठीक न कर पाएं। कारण यह कि ‘आपसी फूट’ की बीमारी एक ऐसा लाइलाज रोग है जिसे कोई ‘रामबाण’ औषधि भी शायद ठीक न कर पाए।
– मध्यप्रदेश की हालिया राजनीति कथित ‘व्यापमं’ घोटाले को उजागर करने वाले डॉ. आनंद राय के प्रयासों से गठित ‘जय आदिवासी युवा शक्ति’ संगठन से उम्मीदें भी थीं कि अल्पसमय में बड़े आदिवासी तबके की आवाज उठाने वाला यह संगठन बड़ी राजनीतिक और सामाजिक क्रांति लेकर आएगा। मगर कालांतर में ही यह हीरालाल अलाव और अंतिम मुजाल्दा की अध्यक्षता में दो अलग-अलग फाड़ हो गया। इससे युवा आदिवासी तबके की शक्ति क्षीण होना स्वाभाविक है।
*क्या टिमरनी में हुई स्थिति कमजोर?*
– विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आदिवासी तबके की विराट रैली निकालकर ‘जयश’ ने तमाम राजनीतिज्ञों को चकित कर दिया था। इससे उम्मीदें तो जागी कि संगठन के प्रत्याशी चुनाव में जीत का ध्वज फहराएंगे।
*जागी उम्मीदें न हो चकनाचूर ?*
इसकी उम्मीदें भी तब और जागी जब संगठन ने हरी झंडी देकर मंडी कर्मचारी रमेश मसकोले को मैदान में उतार दिया। किंतु कुछ समय के अंतराल में संगठन के दूसरे हिस्से से मैदान में उतरकर जय कुमार ने सबको चकित कर दिया। ये जय कुमार वही हैं जिन्होंने जिला पंचायत चुनाव में वृहत स्तर पर कार्य कर एक प्रत्याशी को विजयी बनाकर जिला पंचायत में भेजा है।
इस प्रकार एक साथ दो-दो प्रत्याशी सामने आने से जयश v/s जयश की लड़ाई में अन्य दलों का भला होने की आशंका है।