प्रदीप शर्मा, हरदा।

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में हरदा सीट पर माने जा रहे एकतरफा मुकाबले में पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष एवं भाजपा नेता सुरेंद्र जैन की धमाकेदार एंट्री से चुनावी समर में नया रंग आ गया है। श्री जैन द्वारा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर खुलकर विरोध करने से भाजपा के कद्दावर नेता कमल पटेल के समक्ष नई चुनौती खड़ी हो गई है। इसका किस तरह सामना कर पार्टी के कद्दावर नेता कमल पटेल किला फतह करेंगे। यह सवाल हर राजनीतिक समीक्षक के दिलों में है।

*राजनीतिक सूझबूझ के धनी*
पार्टी से इस्तीफा दे चुके श्री जैन ने पार्टी के नेता नरेंद्र सिंह चौहान के नाम वाली शिलापट्टिका की अवहेलना का मुद्दा बनाकर राजपूत समाज और करणी सेना को साधने का प्रयास किया। वहीं अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन में भी अपना दखल बनाते हुए उन्होंने बार-बार व्यापारियों की समस्याओं को उठाया। जैन समाज में भी सम्मानित पदों पर होने से उनका वैश्य जगत में महत्वपूर्ण स्थान है। उच्च शिक्षित होने से उनकी गहरी पैठ नगर के प्रबुद्ध वर्ग में है। इस प्रकार चुनाव के ऐन मौके पर उनका भाजपा छोड़कर जाना विपक्षी दल को परोक्ष रूप से लाभकारी हो सकता है। बशर्ते कि इसे विपक्षी दल भुना सके।
*उपलब्धि से भरपूर*
भाजपा के सभी पदों से त्यागपत्र दे चुके सुरेंद्र जैन हरदा नगरपालिका के सीधे हुए चुनाव में तीन बार (दो बार स्वयं और एक बार महिला आरक्षण में उनकी पत्नी) अच्छे मतों के अंतर से विजयी हो चुके हैं। उनके कार्यकाल में नगरपालिका को प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ नगरपालिका का पुरस्कार मिला है। यहां के विकास कार्यों और योजनाओं को हर तरफ भरपूर सराहना मिली है।
– नई चुनौती से निपटने क्या होगी भाजपा प्रत्याशी कमल पटेल की रणनीति। पढ़िए अगले एपीसोड में।