
प्रदीप शर्मा संपादक हृदयभूमि।
सचमुच ए दोस्त कहानी कुछ ऐसी है कि अब दोस्त, दोस्त न रहा प्यार, प्यार न रहा, ऐ राजनीति हमें तेरा ऐतबार न रहा।
सुना है कभी ‘महेंद्र ऐन’ आजपा से ‘लूटकर’ ‘खांग’ ‘लेस’ में जाने वाले ठीक समय पर लौट आएंगे।
हमें भी नहीं पता मगर ऐन मौके पर कुछ खेला तो होई न…
- इंतज़ार की घड़ी अभी समाप्त नहीं हुई। हम भी हैं और तुम भी हैं और ये जहां भी है सारा