
जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में चिदानंद पारीक एवं अन्य प्राथमिक शिक्षकों द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई कर हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, लोक शिक्षण आयुक्त भोपाल को नोटिस जारी जवाबतलब किया है।
मामला इस प्रकार है –
चिदानंद पारीक एवम अन्य ने वर्ष 2020 में प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद 27 अक्टूबर 2022 को जारी निर्देश पर जनजातीय कार्य विभाग एव स्कूल शिक्षा विभाग में प्राथमिक शिक्षकों के रिक्त पदों हेतु काउंसलिंग/चयन प्रक्रिया आयोजित की गई। चयन प्रक्रिया के निर्देशानुसार पोर्टल पर उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर उम्मीदवारों को शाला चयन चॉइस फिलिंग करनी थी। काउंसलिंग के निर्देशानुसार, स्कूल शिक्षा एवं आदिवासी विकास की शालाओं में किसी भी शाला का चयन कर सकते थे। इसमें विभाग एवं शाला का आवंटन मेरिट आधार पर होना था। सभी याचिकाकर्ताओं ने 50 से अधिक स्कूल शिक्षा की शालाओं का विकल्प भरा था। परंतु मनमाने तरीके से सभी याचिकाकर्ताओं की पोस्टिंग आदिवासी विकास में कर दी। वहीं दूसरी ओर रैंक में नीचे एवं कम अंक प्राप्त उम्मीदवारों को उनके विकल्प के अनुसार विभाग आवंटन हुआ था।
सभी 13 उम्मीदवारों की ओर से उच्च न्यायालय जबलपुर में पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि एक ओर विभाग आवंटन करते समय स्कूल शिक्षा विभाग ने वादियों की वरिष्ठता का अतिक्रमण किया एवं जूनियर्स को उनके विकल्प अनुसार स्कूल अलॉट की। वही दूसरी ओर 7500 रिक्त पदों पर मई माह में काउसलिंग आयोजित कर रैंक में नीचे स्थापित उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग अलॉट किया। उल्लेखनीय है कि रिक्त पदों का विज्ञापन तब भी अस्तित्व में था जब याचिकाकर्ताओं की पोस्टिंग हेतु काउंसलिंग की जा रही थी।
हाईकोर्ट अधिवक्ता राजेश शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने सुनवाई के बाद आयुक्त लोक शिक्षण को नोटिस जारी कर पूछा कि इस प्रकार की फोर्सफुल पोस्टिंग क्यों की गई जबकि स्कूल शिक्षा में प्राथमिक शिक्षक के पद रिक्त थे। स्कूल शिक्षा को हलफनामा दायर करने हेतु चार सप्ताह का समय दिया है।