June 10, 2026 |

गर्भवती-धात्री महिलाओं ने जाना पोषण आहार का महत्व

सिनर्जी ने ग्राम बोवदा में लगाया शिविर

Hriday Bhoomi 24

हरदा।आदिवासी क्षेत्र की महिलाओ ने जाना गर्भवस्था मे पोषण का महत्व सिनर्जी संस्थान द्वारा संचालित “शिशु एवं मातृत्व स्वास्थ्य कार्यक्रम”द्वारा ग्राम बोवदा मे पोषण संवाद मेला आयोजित किया गया जहां ग्राम की सभी उपस्थित गर्भवती धात्री महिलाओ के साथ पोषण के मुद्दों पर चर्चा की गई तथा पोषण संवाद मेले में सिनर्जी संस्थान से उपस्थित आरिफ द्वारा गर्भवती महिलाओ से चर्चा की गई की आप सभी गर्भवती और धात्री माताएं समुदाय स्तर पर अपने दिनचर्या के भोजन में किन किन पोषण के तत्वों का उपयोग करते है जहां उपस्थित प्रतिभागी द्वारा बताया गया कि हम हमारे गांव में को व्यंजन उपलब्ध है सिर्फ उन्ही का सेवन कर पाते है जैसे कोदू, कुटकी, चावल, रोटी, दाल तथा कुछ हरी पत्तेदार सब्जियां हम हमारे भोजन में उपयोग करते है परंतु हम ये सब चीजें कुछ समय ही खा पाते है निरंतर हम इन चीजों को अपने भोजन में उपयोग नहीं कर पाते जिसपर आरिफ द्वारा बताया गया कि आज को बैठक में हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि हम अपने भोजन में किन किन चीजों का उपयोग कर पोष्टिक आहार ले सकते है जिससे हमे और हमारे बच्चो को पोषण मिल पाए उपस्थित प्रतिभागियों को बताया गया को सामान्य आहार को तुलना में आहार को मंत्र एक चौथाई की वृद्धि करें जैसे साबुत दाले, दालें और छीमी, अंकुरित दालें, गहरी हरी पत्तेदार सब्जियां, गुड, खजूर, मूंगफली, तिल, पादक मूल के आहार है जिनमे प्रचुर मात्रा में आयरन होता है । इनको दैनिक के आहार में शामिल किया जा सकता है । रक्त अल्पता से बचने के लिए आराम को प्रचुरता वाले भोजन के साथ आयरन और फोलिक एसिड टेबलेट का सेवन करें।

शुरू से ही दैनिक आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें। क्योंकि सभी पत्तेदार सब्जियां फोलिक एसिड प्रदान करती है जिसकी शुरुआती महीनों के दौरान बहुत जरूरत होती है। हर रोज एक मौसमी फल खाएं जैसे आंवला, संतरा, अमरूद पुर निबू जैसे फल ले क्योंकि ये आयरन को अवशोषित करने में मदद करते है।

दूध एवं दूध से बनी चीजें जैसे की दही, छाछ का सेवन करें। यदि संभव हो तो अंडा,मांस और मछली खाएं।

आयोडीन युक्त नमक का सेवन करना चाहिए क्योंकि गर्भवती महिलाओ की कोख में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लोहे पर्याप्त मात्रा में आयोडीन की जरूरत होती है। साथ-साथ ही धात्री महिलाओ को जितना वे गर्भावस्था के दौरान खा रही थी उससे अधिक मात्रा में खाने को जरूरत होती है ।

दूध, छाछ, तरल पदार्थ व काफी मात्रा में पानी ग्रहण करें। अंडा, मांस, मछली लाभप्रद है और यदि संभव हो तो आहार इनको शामिल करे। इस कार्यक्रम में उपस्थित साथियों को पोषण संबंधित जानकारी दी गई। कार्यक्रम में सिनर्जी संस्थान से अनिल काजले, संजना कुमरे और कार्यक्रम समन्वयक आरिफ खान उपस्थित रहें।


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