
प्रदीप शर्मा संपादक।
मित्रों लोकसभा चुनाव में लोकतंत्र बचाने और संविधान की रक्षा करने का सवाल सबसे अहं रहा है। मगर लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका पर कभी चर्चा नहीं हुई। यूं तो अभी इस चुनाव के बाद देश का मीडिया इस बात को लेकर कुछ ज्यादा फिक्रमंद है कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा। इसलिए हम ही सोशल मीडिया पर भावी नेता प्रतिपक्ष के बारे में चिंता कर लें।
नेता प्रतिपक्ष भी जरूरी –
बताना जरूरी है कि लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन नेता और भावी प्रधानमंत्री का ऐलान पहले ही कर दिया गया था। मगर भाजपा सरकार बनने पर संविधान को खतरे में बताने वाले इंडिया गठबंधन से कौन बनेगा नेता प्रतिपक्ष बताने की फिक्र कभी नहीं की।
पद का महत्व –
स्मरणीय रहे नेता प्रतिपक्ष का पद मामूली नहीं है। बल्कि इसे कैबिनेट मंत्री का दर्ज के साथ भविष्य में उस दल केे बहुमत में आने पर भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखा जाता है। भाजपा की ओर से वर्षों नेता प्रतिपक्ष रहे नेता स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने कालांतर में दल की सरकार बनने पर प्रधानमंत्री के रूप में नेतृत्व किया था।
इंडी गठबंधन में कांग्रेस का दावा –
इसलिए आज भाजपा के नरेंद्र मोदी की सरकार बनने पर विपक्ष से लोकतंत्र के रक्षक पर सभी चिंतकों की निगाहें लगी हुई हैं। देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में इंडी एलायंस में सबसे बड़ा दल होने के नाते कांग्रेस का अधिकार है कि वह अपने किसी नेता का ऐलान कर दे। इसमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष अभिजीत राय के साथ दल को मैन स्ट्रीम में लाने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे के बादउत्तर और दक्षिण भारत में दो सीट पर विजयी होने वाले राहुल गांधी दावेदार हो सकते हैं। ऐसे में यदि ममता बहन कुछ कहने लगें तो उनकी बला से।
