#…मेरे पास आओ मेरे दोस्तों एक किस्सा सुनो –
जिंदगी में दोस्ती से बड़ी कोई ताकत नहीं, बस दोस्त सच्चे बनाएं

प्रदीप शर्मा संपादक।
‘…मेरे पास आओ मेरे दोस्तों, एक किस्सा सुनो’ वाला गीत तो सभी ने सुना होगा। मैंने भी सुना था।
मगर मेरे सामने शेरो-शायरी वाला नहीं सचमुच का एक शेर आ गया था।
तो चला जा रहा था मैं डरता हुआ/ हनुमान चालीसा पढ़ता हुआ।
फिर क्या हुआ दोस्तों…
मेरी हिम्मत तो चली गई/
बैठ गया मैं हाथ बांधे
शेर ने ही कह दिया चलो दोस्त,
आज अपनी दावत है।
तो क्या हुआ, वो शेर मेरा दोस्त ही था।
दोस्ती से बड़ी कोई ताकत या संबल नहीं बस यही याद रखें।
