May 27, 2026 |

न मुस्कुराएं, न बात करें मेरे साथ बैठने की जमीं तलाशो कहीं

राजनीति में दोस्त चापलूस हर जगह पुजाते हैं, सच्चा मुश्किल से मिलता है

Hriday Bhoomi 24

प्रदीप शर्मा संपादक।

शर्म आती नहीं,

उनसे मिलने में

जो कभी आपस में

दुश्मन हुआ करते थे।

अब झुक-झुक कर एक दूसरे को प्रणाम कर गले लगाते हैं।

शायद इसी का नाम है राजनीति।

जो काम का उसे गले लगाया/

जो पुराना उसे ठुकराया/

-एक शायर की जुबानी याद आती है /

मेरे पास आएं तो न मुस्कुराना/

न बात करना कभी दिल की/

यहां पर हम सभी मुसाफिर हैं/

आए थे यहां फिर

बिना मिले भी हम

चले जाएंगे कहीं/


Hriday Bhoomi 24

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