December 9, 2025 |

उच्च शिक्षा मंत्री परमार का संदेश: विश्व एक परिवार है, बाजार नहीं

Hriday Bhoomi 24

विश्व एक बाजार नहीं, विश्व एक परिवार है : उच्च शिक्षा मंत्री परमार

उच्च शिक्षा मंत्री परमार का संदेश: विश्व एक परिवार है, बाजार नहीं

भारतीय दृष्टिकोण-वसुधैव कुटुंबकम्; का विश्वमंच पर जितना व्यापक प्रभाव होगा, उतना लोककल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा : परमार

"मप्र राज्य स्तर राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार/प्रशस्ति का वितरण" समारोह सम्पन्न

भोपाल 

विश्व एक बाजार नहीं, विश्व एक परिवार है। "वसुधैव कुटुंबकम्" का यही मूल भाव, भारत का दृष्टिकोण है। भारतीय दृष्टिकोण विश्वमंच पर जितना प्रभावशाली एवं व्यापक होगा, वैश्विक परिधियों में लोक कल्याण का मार्ग उतना ही प्रशस्त होगा। विश्व के लोग, भारतीय दृष्टिकोण को आत्मसात् कर लोकल्याण के भाव से सामाजिक सरोकार सीखेंगे। "राष्ट्रीय सेवा योजना" इसी मूल ध्येय के साथ, राष्ट्र के पुननिर्माण में अपनी भूमिका का निर्वाहन कर रही है। राष्ट्रीय सेवा योजना, का उद्देश्य संवेदनशील एवं समाजसेवा भावी श्रेष्ठ नागरिक निर्माण करना है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने मंगलवार को भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय परिसर स्थित ज्ञान-विज्ञान भवन में, "मप्र राज्य स्तर राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार/प्रशस्ति का वितरण" समारोह के अवसर पर कही। मंत्री परमार ने उत्कृष्ट स्वयंसेवक विद्यार्थियों एवं एनएसएस पदाधिकारियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया। परमार ने सभी पुरस्कृत होने वाले स्वयंसेवकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और अन्य समस्त स्वयंसेवकों को बेहतर प्रयासों के साथ उक्त पुरस्कार प्राप्त करने के लिए उनका मनोबलवर्धन भी किया। परमार ने एनएसएस की पुरस्कार विवरण पुस्तिका का विमोचन भी किया।

उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना, भारत की अस्मिता एवं सामर्थ्य को प्रभावी रूप से विश्वमंच पर परिलक्षित करने का आन्दोलन है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप आकार ले रहे शिक्षा तंत्र के माध्यम से और भारत केंद्रित एवं वसुधैव कुटुंबकम् के भाव के साथ, भारत पुनः विश्वमंच पर सिरमौर बनने की ओर अग्रसर है। अपनी संस्कृति, परम्परा एवं विरासत के आधार पर पुनः "विश्वगुरु भारत" बनने के संकल्प की सिद्धि होगी। परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत, सौर ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्म निर्भर होकर, अन्य देशों की पूर्ति करने में समर्थ देश बनेगा। साथ ही वर्ष 2047 तक खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्म निर्भर होकर, अन्य देशों का भरण पोषण करने में भी सामर्थ्यवान देश बनेगा। हम सभी की सहभागिता से, अपने पूर्वजों के ज्ञान के आधार पर पुनः विश्वमंच पर सिरमौर राष्ट्र का पुनर्निर्माण होगा। इसके लिए हमें स्वाभिमान के साथ हर क्षेत्र में अपने परिश्रम और तप से आगे बढ़कर, विश्वमंच पर अपनी मातृभूमि का परचम लहराना होगा।

उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कार्यक्रम के उपरांत विश्वविद्यालय परिसर में एक पेड़ मां के नाम अभियान अंतर्गत पौधरोपण किया। मंत्री परमार ने राष्ट्रीय सेवा योजना के द्वारा आयोजित तिरंगा यात्रा में सहभागिता भी की।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवियो का समर्पण सराहनीय है। एनएसएस का दायित्व है कि बेहतर मानवीय मूल्यों के साथ, सुनहरे भारत के निर्माण में सहभागिता करें। राजन ने सफल स्वयंसेवकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय सेवा योजना सेवाकर्मियों द्वारा शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण एवं समाज सेवा के क्षेत्र में स्वैच्छिक कार्यों को मान्यता दिए जाने के लिए, उक्त पुरस्कार दिए जाते हैं। उक्त पुरस्कार समारोह में वर्ष 2020-21 एवं वर्ष 2021-22 के पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम के आरंभ में राष्ट्रीय सेवा योजना का लक्ष्य गीत का सामूहिक गायन हुआ एवं समारोह का समापन राष्ट्र-गान के सामूहिक गायन के साथ हुआ।

आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार जैन, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमैन भरत शरण सिंह, क्षेत्रीय निदेशक एनएसएस अशोक कुमार श्रोती एवं राज्य एनएसएस अधिकारी मनोज अग्निहोत्री सहित राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवी विद्यार्थी, एनएसएस के पदाधिकारीगण, विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं अन्य गणमान्य जन उपस्थित थे।

 


Hriday Bhoomi 24

हमारी एंड्राइड न्यूज़ एप्प डाउनलोड करें

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Verified by MonsterInsights