May 25, 2026 |

#महाकुंभ 2: कैसे बनते हैं नागा साधु और साध्वी

बड़ा रहस्यमय है नागा साधुओं का जीवन

Hriday Bhoomi 24

हृदयभूमि स्पेशल।

सभी पाठकों के मन में यह सवाल है कि नागा साधु या नागा साध्वी कैसे बना जाता है। सो यह प्रक्रिया दोनों के लिए लगभग समान है। इसके लिए 10 से 15 साल तक कठिन ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। महिला को नागा साधु बनने लिए सबसे पहले अपने गुरू को यह विश्वास दिलाना होता है कि वह नागा साध्वी बनने के लिए योग्य हैं। और खुद को ईश्वर के प्रति समर्पित कर चुकी हैं। इसके बाद गुरू उन्हें नागा साधु बनने की स्वीकृति देते हैं। नागा साधु बनने से पहले महिला का बीता हुआ जीवन देखकर यह पता किया जाता है कि वह ईश्वर के प्रति समर्पित है या नहीं। और वह नागा साधु बनने के बाद कठिन साधना कर सकती है या नहीं।

पिंडदान कराना आवश्यक –

नागा साधु बनने से पहले महिला को जीवित रहते ही अपना पिंडदान करना होता है और मुंडन भी कराना पड़ता है। मुंडन कराने के बाद महिला को नदी में स्नान कराया जाता है और फिर महिला नागा साधु पूरा दिन भगवान का जप करती हैं। पुरुषों की तरह ही महिला नागा साधु भी शिवजी की पूजा करती हैं। सुबह ब्रह्म मुहुर्त में उठकर शिवजी का जाप करती हैं और शाम को दत्तात्रेय भगवान की आराधना करती हैं। दोपहर में भोजन के बाद फिर वह शिवजी का जाप करती हैं। नागा साधु खाने में कंदमूल फल, जड़ी-बूटी, फल और कई तरह की पत्तियां खाते हैं। महिला नागा साधु के रहने के लिए अलग-अलग अखाड़ों की व्यवस्था की जाती है।

दस साल पहले मिली पहचान-

करीब 10 साल पहले वर्ष 2013 में इलाहाबाद कुंभ में पहली नागा महिला अखाड़े को अलग पहचान मिली थी। ये अखाड़ा संगम के तट पर जूना संन्यासिन अखाड़ा के तौर पर नजर आया। तब नागा महिला अखाड़े की नेता दिव्या गिरी थीं, जिन्होंने साधु बनने से पहले इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड हाइजिन, नई दिल्ली से मेडिकल टैक्नीशियन की पढ़ाई पूरी की थी। वह वर्ष 2004 में विधिवत तौर पर महिला नागा साधु बन गईं। तब उन्होंने कहा था कि हम कुछ चीजें अलग से करना चाहती हैं। जूना अखाड़े के इष्टदेव भगवान दत्तात्रेय हैं, हम अपना इष्टदेव दत्तात्रेय की मां अनुसूइया को बनाना चाहती हैं।


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