#मोदी तेरा कार्पोरेट सेक्टर : विज्ञापनों का है बड़ा दीवाना 😊
बड़ी औद्योगिक कंपनियों के आने से विज्ञापन इंडस्ट्री में आया बूम

प्रदीप शर्मा संपादक हृदयभूमि।
देश में 1914 के लोकसभा चुनाव पश्चात भारतीय जनता पार्टी के श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ऐसे पहले स्वतंत्र प्रधानमंत्री मिले, जिन्हें देश के लिए उन सारे सपनों को साकार करने का मौका मिला जो पहले किन्हीं अन्य दलों की बैशाखियों के सहारे होने से नहीं कर पाए थे।
बदलाव का असर-
–वैश्विक अर्थव्यवस्था के तमाम दावों के अनुसार आज यदि हमारा भारतवर्ष दुनिया में 5 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। तो इसका श्रेय भारत सरकार की नीतियों के साथ नई व्यवस्थाओं और उस युवा पीढ़ी को भी जाता है जो दिनरात अपने-अपने स्तर पर आगे बढ़ने की होड़ में लगे हैं। आज इसका असर हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं के साथ तमाम उस बड़े फील्ड में भी पड़ा है जो पहले कभी दिखाई नहीं दिए। मगर इसके अलावा ऐसा और क्या बदलाव आया कि बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटी भी इसकी दीवानी हो गई। तो आइए इसे जानते हैं हमारे इस स्पेशल एपीसोड में।
एक इंडस्ट्री का उदय, जो सुप्त थी –
यह तो सभी जानते हैं कि मोदी युग आने के बाद देश मेंं देश-विदेश की ऐसी तमाम बड़ी कंपनियों की बाढ़ सी आ गई जिनकी ख्याति वैश्विक स्तर पर थी। मगर बाहर की कंपनियां हों या देश की कंपनीज़ सभी ने भारत सरकार की मंशानुरूप अपने सरोकार भारतीय जीवन-मूल्यों में रखकर काम किया और अनुमानित रूप से लाखों व करोड़ों डॉलर का व्यापार करने में सफल हुए।इससे देश की अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार आया।
नई पालिसी का नतीजा –
ये कंपनियां ऐसे उत्पादों को लेकर सामने आईं जो हमारे खान-पान के साथ रहन-सहन और जीवन शैली से जुड़े हुए हैं। जाहिर सी बात है कि हर आम और खास के जीवन में काम आने वाली उत्पादों को घरोंघर पहुंचाने उनके दिलो-दिमाग पर कैसे कब्जा किया जाए। सो ऐसी स्थिति में एक ऐसी नई इंडस्ट्री का उदय हुआ जिसके किरदारों ने बड़ी कंपनियों को सेवा देकर उनकी बात घरोंघर ही नहीं हर दिलों जुबां तक पहुंचा दी।
करोड़ों का कारोबार कर रही-
जी हां, बालीवुड और अन्य फिल्म इंडस्ट्रीज की तरह आज करोड़ों-अरबों रुपए का कारोबार करने वाली विज्ञापन फिल्म जगत से जुड़ी कंपनियों के साथ काम करने के लिए पहले कोई नामी चेहरा तैयार नहीं होता था। किसी जमाने में इसके साथ काम कर झरने में नहाते हुए, स्नान के साबुन का प्रचार करने वाली “लिरिल” गर्ल तो सभी को याद होगी, जिसके अभिनय और ग्लैमर ने फिल्म दर्शकों को दीवाना कर दिया था। बाद में प्रीति जिंटा ने बालीवुड में एकल महिला प्रधान फिल्मों को सुपर-डुपर हिट किया था। मगर तब भी विज्ञापन फिल्म इंडस्ट्री की ओर बड़े-बड़े सेलेब्रिटीज़ की निगाहें इस रूप में नहीं गईं, जिस रूप में आज यह विद्यमान है। बता दें कि पहले बड़े पर्दे के कलाकार छोटे पर्दे की कृतियों और कलाकारों को हेय दृष्टि से देखते थे। मगर इसी छोटे पर्दे के एक धारावाहिक सरकस से निकले कलाकार शाहरुख खान ने बाद में बाॅलिवुड फिल्म इंडस्ट्री पर वो सिक्का जमाया कि उनकी फैन फालोइंग के सामने बड़े सितारे भी झिलमिलाने लगे।
कैसे ये बदले हालात –
बहरहाल हम यहां बात कर रहे हैं प्रीति जिंटा जैसी फिल्म स्टार देने वाली उस विज्ञापन फिल्म इंडस्ट्री की जिसकी ओर पहले कभी किसी की निगाहें नहीं गई। मगर समयचक्र ऐसा बदला कि अब बड़े पर्दे के कलाकार ही नहीं तमाम अन्य सेलेब्रिटीज़ भी इस इंडस्ट्री में आने को उतावली हैं। अब इसमें आपको महान नायक ही नहीं वर्तमान सुपर स्टार्स तथा और किसी जमाने में बड़े पर्दे की रानी रही बालीवुड की अभिनेत्री आदि को किसी न किसी कंपनी के उत्पादों को प्रमोट करते देखा जा सकता है।
क्या है विज्ञापन फिल्म इंडस्ट्री-
विज्ञापन फिल्म इंडस्ट्री के बारे में चर्चा करते हुए हम पहले ही साफ बता दें कि जिस तरह बाॅलिवुड या अन्य फिल्म जगत में कोई एक अकेली निर्माता कंपनी नहीं है। ठीक उसी तरह विज्ञापन फिल्म इंडस्ट्री भी कोई एक कंपनी नहीं है। बल्कि इस फील्ड में काम करने वाले अनेक निर्माता, कलाकार और टेक्निशियन्स की टीम है, जो अलग-अलग टीम के साथ काम करते हुए उन विभिन्न उत्पादों का प्रचार करती हैं, जिनका अनुबंध उन्हें मिलता है। मगर कुछ वर्षों पूर्व इस जगत से जुड़े कलाकारों को वह मान नहीं मिला। जबकि यहां से निकली एक तारिका ने बड़े पर्दे पर सिक्का जमाया था।
करोड़ों का कारोबार कर रही इंडस्ट्री –
मुद्दे की बात है कि जिस इंडस्ट्री के लोगों को बड़ी शख्सियतें या कहें कि सेलेब्रिटीज़ भाव नहीं देते हैं, तो ऐसा हुआ कि इसमें काम करने के लिए बड़े से बड़े सेलिब्रिटी और अभिनेता उतावले हैं। इसका असल कारण है कि उत्पादों का प्रचार करने वाले इनके विज्ञापन इतने रचनात्मक हैं कि ये हर घर-परिवार के लोगों की जुबां पर हैं। दूसरा कारण यह है कि इस इंडस्ट्री में अब इतना पैसा आ गया है कि अनेक बड़े दबंग खान, महान नायक और पर्दे की रानियां आने लगी हैं। फिर यह पैसा आया कहां से, तो जवाब यही है कि देश के घरोंघर में अपने उत्पाद भेजने को उतावली बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों की फंडिंग। जो इन सितारों की डिमांड पूरी करने में सक्षम है। सो देश मेंं आई औद्योगिक क्रांति का एक प्रभाव यह भी है कि जिस विज्ञापन फिल्म इंडस्ट्री पर किसी का ध्यान नहीं था। आज उसमें शामिल होने को लोग उतावले हैं।
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