
प्रदीप शर्मा संपादक
हमारे देश में एक कहावत मशहूर है कि कानून से बड़ा कोई नहीं और संवैधानिक दृष्टि से हकीकत भी है। इससे कोई भी, कभी इन्कार नहीं कर सकता। मगर जबसे केंद्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार आईं हैं। विपक्ष का मिजाज कुछ गड़बड़ होने लगा है। बीते दिनों ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं जिनसे पता चलता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या प्रदेश में भाजपा की सरकारों के विरोध में ऐसा कुछ भी करने को उतारू हो जाएं, जिसकी इजाजत भारतीय संविधान नहीं देता।
हाल की घटनाएं याद करें या सन 2014 से लेकर अब तक की। अनेक ऐसी राजनीतिक घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे विपक्ष की खीज साफ नजर आती है।
अभी कुछ दिनों पूर्व संसद में कतिपय सिरफिरों के घुसकर हंगामा करने का मामला हो या अनेक ऐसे मसले। सभी में विपक्ष का रवैया सिवाए मोदी सरकार का विरोध करने के और कुछ नजर नहीं आया। अनेक घटनाएं तो ऐसी भी हैं कि पर्दे के पीछे रहकर सरकार का विरोध करना। राजनीति शर्मनाक यह कि इन्होंने कोसने में माताओं और बहनों को नहीं बख्शा, जबकि ये चुनकर आए थे प्रथम सदन में।
– जब देश में वैश्विक महामारी कोरोना का संकट आया था तब वैक्सीन न होने का हंगामा मचाने के बाद दुनिया में सबसे पहले कारगर दवा तैयार करने का विरोध किया गया। कृषि कानून के विरोध में तो इंतहां हो गई, जबकि इस कानून की मंशा किसानों को बिचौलियों से बचाना थी।
– याद करें किस प्रकार हाई-वे को अवैध रूप से महीनों तक जाम कर देश के व्यापार, अर्थव्यवस्था और सामान्य जनजीवन को विचलित करने का प्रयास हुआ।
इन सबके साथ पर्दे के पीछे कौन लोग थे इनके चेहरे छिपे हुए नहीं हैं। अभी संसद में कतिपय हमले की घटना पर जांच होने के पूर्व ही देश की फिजा बिगाड़ने की कोशिशों में कौन सी ताकतें सक्रिय हैं। कल्पना करें इसके पीछे विदेशी ताकतों का वह हाथ होता जिसका जिक्र पूर्व प्रधानमंत्री अनेक बार किया करती थीं। तब क्या होता। हमारा मानना है कि कानून से बड़ा कोई नहीं है। यहां पूर्व प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपति के परिवारों पर भी मुकदमे चलते आए हैं। इसलिए व्यवस्था का सम्मान करना ज्यादा ठीक है।
कानून और देश से बड़ा कोई नहीं होता
यह बात जापान और अन्य देशों से सीख लें तो और बेहतर है।