June 10, 2026 |

पंचकोसी यात्रा : जलोदा में पेड़ीघाट की दरकार

24 फरवरी से शुरू नर्मदा की पंचकोसी यात्रा

Hriday Bhoomi 24

गोपाल शुक्ला, हरदा

हर साल निकलने वाली पंचकोसी यात्रा में नर्मदा के दक्षिण तट ग्राम-जलोदा में हज़ारों यात्रियों का आगमन होता है। कुछ यात्री संत श्री १००८ गुरु महाराज रतिराम बाबा समाधि परिसर में अथवा कुछ यात्री किनारे पर कुछ ग्राम में एक रात्रि विश्राम करके अपनी यात्रा को निरंतर करते है
यह यात्रा कई वर्षों से निरंतर होती है। यहां पर स्थित प्राचीन जलोदा मठ समाधि को ज़िले की धार्मिक स्थल सूची मे जोड़ा ज़ाए एवं घाट निर्माण को कार्ययोजना सूची में जोड़ कर निर्माण कार्य को शासन द्वारा नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किया जाए। हर वर्ष जलोदा में पंचकोशी यात्रियों को ट्रस्ट द्वारा हजारों पैकेट भोजन वितरित किया जाता है

24 फरवरी को पुण्य सलिला मां नर्मदा की पंचकोसी यात्रा प्रारंभ होगी। देवास जिले के नेमावर सिद्धनाथ घाट से श्रद्धालु पंचकोसी यात्रा प्रारंभ करेंगे। यात्री देवास जिले के उत्तर तट बिजलगांव से दक्षिण तट से यात्रा प्रारंभ कर हरदा जिले के जलोदा ग्राम में 24-25 फरवरी को पहुंचेंगे। लेकिन शासन प्रशासन ने पंचकोसी यात्रियों के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं। हजारों पंचकोसी यात्रियों को ठहरने के लिए कोई उत्तम व्यवस्था नहीं है।
ग्रामीण छोटू पटेल गुर्जर ने कहा कि हर साल पंचकोसी यात्रा पर हजारों श्रद्धालु निकलते हैं। लेकिन यात्रियों के लिए शासन प्रशासन ने अच्छा मार्ग बनाकर नहीं दिया है। यात्रियों को कंकर-पत्थर, कीचड़ से ही गुजरना पड़ता है। कई यात्री नंगे पैर पैदल गुजरते हैं।

ग्रामीणों ने कई बार इस समस्या से प्रशासन को अवगत कराया लेकिन आज तक कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई। इस बार भी कीचड़ भरे, ऊबड़-खाबड़ मार्ग से हजारों यात्री गुजरेंगे। हरदा जिले में गोंदागांव-गंगेश्वरी से छीपानेर, लछोरा, शमसाबाद, जलोदा, गोयत, सुरजाना,  मनोहरपुर, भमोरी और हंडिया तक मार्ग खराब है।

जलोदा में माँ नर्मदा तट पर संत गुरु महाराज १००८ रतिराम बाबा की लगभग 300पूर्व बाल्यावस्था जीवित समाधि है। समाधि पर प्रतिवर्ष निशान चढ़ाये जाते है और मेले का , भंडारे का आयोजन होता है यहाँ की तोप अभी हरदा कचहरी (वर्तमान न्यायालय) प्रांगण में रखी है। 


ज़िले में एक ही मंदिर श्री हरिहर भगवान का प्राचीन मंदिर है। प्राचीन शिव मंदिर है। लेकिन यहां ठहरने के लिए उत्तम व्यवस्था नहीं है। पंचकोसी यात्री इधर-उधर लोगों के घरों में रात्रि विश्राम करते हैं। तरुण महंत ने बताया श्री गुरु रतिराम बाबा की जीवित समाधि के उचित रख रखाव की जरूरत है। समाधि की पिचिंग दीवार बनाई जाए, जलोदा में नर्मदा तट पर अब तक कोई पक्का घाट नहीं बना है।

उल्लेखनीय है नर्मदा पंचकोसी यात्री देवास जिले से चलकर नाव के जरिए जलोदा में नर्मदा तट उतरकर नर्मदा के किनारों के गांवों से होकर हंडिया पहुंचेंगे। रात्रि विश्राम के बाद यात्रा उचान घाट के लिए जाएगी। जहां से यात्री नाव से नर्मदा पार कर देवास जिले में पहुंचेंगे। नेमावर में ही यात्रा समाप्त होगी।


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