वनांचल में पानी की त्राहि-त्राहि, कमाल है – जवाब नहीं दे रहे पीएचई अधिकारी
जिम्मेदार अधिकारी से जनसुनवाई व समीक्षा मीटिंग में जवाब मांगा

- अपनी गड़बड़ कार्यशैली के चलते जिले के लोक स्पीअपनी गड़बड़ कार्यशैली के चलते जिला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री पवनसुत गुप्ता पर सवालिया निशान हैं। एक दिन पूर्व जिला कलेक्टर ने विभाग के कुछ ठेकेदार ब्लैक करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदीप शर्मा संपादक हृदयभूमि हरदा। कमाल है भाजपा के बड़े नेताओं की कर्मभूमि और एक केंद्रीय मंत्री का संसदीय इलाका होने के बावजूद उनके क्षेत्र में वनांचल के आदिवासी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे। प्रदेश में भाजपा के मोहन राज में अफसरों का मिजाज भी कुछ ऐसा है कि यहां अफसर ही अपने बड़े अफसरों की सुनवाई नहीं कर रहे। यही वजह है कि आम जनता की कही कोई गति नहीं है।
आपको बता दें कि गत लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने का वादा किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस योजना पर करोड़ों का बजट दिया। मगर इसके बावजूद यह अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई है। अकेले हरदा जिले की ही बात करें तो यहां के अनेक वनग्रामों में जल ही जीवन है मिशन अपने लक्ष्यों से कोसों दूर नजर आता है।
कई बार हुई शिकायत-
गत वर्ष 2024 में दिसंबर माह के अंतिम पखवाड़े में हंडिया तहसील के ग्राम जामुनवाली से आए लोगों ने पानी की समस्या बताई थी। इसके बाद 2025 के मार्च के अंतिम पखवाड़े में वनग्राम राजाबरारी से आए लोगों ने अपनी समस्या का इजहार जिला प्रशासन के सामने किया था। मगर कहां क्या कार्रवाई की जा रही है और क्या हालात हैं मीडिया द्वारा पूछे जाने पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अधिकारी पवन सुत गुप्ता ने यह बताने की जरूरत नहीं समझी।
समीक्षा बैठक में भी रहे निशाने पर-
पीएचई अधिकारी पवन सुत गुप्ता की लापरवाही और कार्यशैली देखते हुए गत दिनों जिला कलेक्टर आदित्य सिंह ने समीक्षा बैठक बुलाकर सीधे चर्चा कर कार्य एजेंसी के दो ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इस प्रकार जिले में जिस तरह कार्य चल रहे हैं उससे लगता है कि पूरे ग्रीष्म काल दौरान जिला प्रशासन को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की निगरानी करनी होगी। अन्यथा गांवों में खासकर वनांचल में हालात बिगड़ सकते हैं।
आंकड़ों में माहिर विभाग –
कार्य एजेंसी द्वारा जल-जीवन मिशन की सफलता के आंकड़े पेश करने में कहीं कोई कमी नहीं की जाती है। मगर अलबत्ता असल स्थिति कोसों दूर है। यहां वनांचल के रहवासी पीने के पानी का बरतन सिर पर रखकर पैदल और बैलगाड़ियों से लाने अभी भी मीलों दूर जाते हैं।
