
हृदयभूमि, हरदा।
कालभैरव अष्टमी के पावन अवसर पर शुक्ला एवं शर्मा परिवार द्वारा अपने कुल देवताओं का पूजन किया गया। परिवार ने कुलदेवता भैरव का विधि-विधान के साथ अभिषेक, पूजन, हवन किया। इस दौरान ओंकारेश्वर से आए पं श्याम शुक्ल द्वारा बाबा का आकर्षक दिव्य श्रृंगार किया गया ।
शुक्ला परिवार के गोपाल शुक्ला ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह दिव्य प्रतिमा 25 वर्ष पूर्व नर्मदा के बीच बने चबूतरे पर दो मूर्ति स्थापित थी। काला भैरव एवं गौरा भैरव यह दोनों भाई थे। यहां नर्मदा के तेज बहाव में गौरा भैरव बाबा की मूर्ति नर्मदा यहां की रेत में समा गई। वहीं दूसरी कालभैरव की मूर्ति वहीं पर स्थापित रही।
ढाई दशक वर्ष पूर्व गांव के पहलवानों ने इसे हनुमान जी की मूर्ति समझकर गांव के अखाडे मे ले जाने का खूब प्रयास किया, परंतु विफल रहे। यह मूर्ति अखाड़े (व्यायामशाला) तक न जाकर गांव में पीपल के वृक्ष के नीचे रखने के बाद वहां से नहीं उठी।
कुछ समय पश्चात बाबा की प्रेरणा से पं. गोपाल शुक्ला, पं मुरलीधर शुक्ला के प्रयासों एवं परिवार के सहयोग से नर्मदा तट पर ओटला निर्माण कर पुन: विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा कर स्थापित किया गया। ताकी परिवार के सभी लोग किसी भी समय पर आकर बाबा के दर्शन कर सकें।
कुछ समय बाद शर्मा परिवार के स्व. जगन्नाथ शर्मा एवं परिवार द्वारा गौरे भैरव बाबा की दूसरी मुर्ति लाकर प्राण प्रतिष्ठा की गई। कुल देवता की प्रेरणा से शुक्ला एवं शर्मा परिवार द्वारा गत 12 वर्षो से कालभैरव अष्टमी पर विधि-विधान के साथ अभिषेक, पूजन, हवन एवं भंडारे का कार्यक्रम किया जा रहा है।
इसमें दोनों परिवार के साथ अन्य श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं। यह बहुत ही दिव्य एवं जाग्रत स्थान है। यह ग्राम बड़ी छीपानेर नर्मदा तट पर हरदा से महज 25 किलो मीटर दूर पर स्थित है।
भैरव अष्टमी पर शुक्ला एवं शर्मा परिवार के सभी श्रद्धालु यहां बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। सभी ने पूजन कर अपने कुल देवता भैरव बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य है कि नई पीढ़ी की श्रद्धा अपने कुल देवता के प्रति बनी रहे। और दोनों परिवार में आपसी मेलजोल बना रहे।
