
हृदयभूमि विचार :
आज के जमाने में एकमात्र पत्रकारिता ऐसा पेशा है, जहां श्रमजीवी पत्रकार नाममात्र के मानदेय पर काम करता है। यह इतना भी नहीं होता कि इसके दम पर पत्रकार अच्छे भले मध्यम सपन्न परिवारों की गिनती में आ जाएं।
– यह देखा गया है कि कभी किसी वर्ग या व्यक्ति को सब्सिडी न मिल पाए तो अकेला पत्रकार ही उनकी आवाज उठाता है।
– किसी कमजोर वर्ग की भूमि या संपत्ति पर जब कोई दबंग कब्जा कर लेता है तब यही पत्रकार अपनी कलम चलाता है।
– कोई अफसर जब अपनी वाली दिखाकर हितग्राही की सुनवाई नहीं करता तब रिपोर्टर ही उसे अपनी सीमाएं बताकर आगाह करता है।
– जब शासन मनमर्जी का कानून बनाकर फरमान जारी करता है, तब जनता को जगाकर प्रेस ही सरकारों को आगाह करती है।
ऐसी घड़ी में किसी सजग पत्रकार को याद करें वह हरकदम आपके साथ मिलेगा।
