#फुटकर व्यापार खतरे में : 8 साल में 10 लाख से अधिक किराना दुकान बंद
क्या आनलाइन बिजनेस से खत्म हो जाएंगे पारंपरिक फुटकर कारोबार

हृदयभूमि, नई दिल्ली।
देश में आनलाइन पैमेंट की सुविधा आने के बाद अब पारंपरिक फुटकर व्यापार खतरे में आ गया है। अपुष्ट आंकड़ों को मानें तो बीते 8 साल में यहां 10 लाख से अधिक किराना दुकान बंद हो चुकी हैं। ऑनलाइन बाजार इस कदर बढ़ गया है कि पारंपरिक किराना दुकानों पर तेजी से बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। देश-दुनिया मेंं इन दिनों जोमैटो और अमेजन जैसी अन्य कंपनियां का वर्चस्व बढ़ गया है। जब बड़ी कंपनियां सीधे लोगों के घर सामान पहुंचाने लगें तो पड़ोस में चल रही खुदरा किराना स्टोर का क्या हश्र होगा?
चिंताजनक हैं आंकड़े हैं-
जानकारी के अनुसार वर्ष 2015-16 से 2022-23 के बीच शहरी क्षेत्र में किराना दुकानों 9.4 प्रतिशत कमी हो गई है। इसका सीधा आशय है कि इन आठ वर्षों में लगभग 11 लाख 50 हजार कम हो गई है। इसके विपरीत एक हकीकत यह भी है कि 2010-11 और 2015-16 के बीच शहरी क्षेत्र में ऐसी दुकानों या आउटलेट की संख्या 20 परसेंट बढ़ गई थी। बहरहाल किराना दुकानें बंद होने का खामियाजा सिर्फ शहरों ने ही नहीं बल्कि ग्रामीण अंचल ने भी भुगता है। आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण अंचल में एक साल में इन किराना दुकानों की संख्या लगभग 56 हजार कम हो गई। अब बड़ी निर्माता कंपनियां भी सीधे सामान बेचने को तैयार हैं। इससे निर्माता और उपभोक्ता के बीच सप्लाई करने वाली अलग कंपनियों की जरूरत खत्म हो जाएगी।
अब लोगों के मोबाइल में है पैसा-
किराना की दुकानों की संख्या कम होने की एक नहीं कई वजह हैं। इसका एक महत्वपूर्ण कारण विमुद्रीकरण भी है। देश में जब नोटबंदी लागू हुई थी, तब बड़ी संख्या में किराना दुकानें बंद हो गई थीं। इसके बाद लोग अब पहले की तुलना में जेब में कैश कम रखने लगे हैं। उनका पैसा बैंक खातों में है जो सीधे मोबाइल से जुड़ा है। ई-कॉमर्स ने भी कैश रखने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है।
फायदा ग्राहकों का-
आईटीसी और यूनिलीवर जैसी कंपनियां भी सीधे बिक्री के पक्ष में हैं। इससे बीच में कमाई करने वालों या एजेंसी की जरूरत ही खत्म हो जाएगी।इसका फायदा कंपनियां ग्राहकों को देने के लिए तैयार हैं। यह कंपनियां अपने और ग्राहकों के बीच की लंबी चेन को कम करना चाहती हैं। कंपनियां चाहती हैं कि अभी पारंपरिक किराना दुकानों पर जिस कीमत पर उन्हें सामान मिलता है, उससे कम कीमत पर सीधे ग्राहकों के घर क्यों ना पहुंचा दिया जाए।
*डायरेक्ट सेलिंग*
आईटीसी का लगभग 31 प्रतिशत सामान ऑनलाइन बिक रहा है। ब्लिंकिट के ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। होम डिलीवरी वाली कंपनियां 10 से 15 मिनट में लोगों के घरों तक सामान पहुंचा रही हैं। इससे ज्यादा समय तो लोगों को पड़ोस की किराना दुकानों तक पहुंचने में ही लग जाता है। जोमैटो ने साल 2023-24 में ऐसे करीब इक्कीस करोड़ ऑर्डर डिलीवर किए।