
प्रदीप शर्मा संपादक।
खांटु श्याम, नाम तो बहुत सुना होगा। इन्हें भगवान श्रीकृष्ण ने कलियुग में ‘हारों का सहारा’ बनने का वरदान दिया था। इनके बारे में महाभारत काल की एक कथा प्रचलित है कि इन्हें भगवान महादेव ने तीन तीर दिए थे, 1 से हारों का बचाव, दूसरे से दुश्मनों का संहार और तीसरे से संपूर्ण सृष्टि का विनाश।
–मगर भीमपुत्र बर्बरीक का यह प्रण था कि वह उनकी ओर सेे युद्ध लड़ेंगे जो हार रहा हो। उस काल मेंं जब बर्बरीक को सूचना मिली कि कुरूक्षेत्र के मैदान में एक महायुद्ध हो रहा है। तब वह अपने तीन तीर कमान लेकर निकल पड़े हारे का सहारा बनने।
– इस मौके पर पांडवों की जीत भांपते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से दान-स्वरूप उनका शीष मांग लिया। भगवान ने उस शीष के बदले उन्हें कलियुग में स्वयं भगवान श्याम के रूप में हारे हुए लोगों का सहारा बनने का वरदान दिया।
– आज यही खांटु श्याम हैं जो हर हारे का सहारा हैं।
