
प्रदीप शर्मा सीनियर जर्नलिस्ट।
कर्नाटक, हिमाचल विधानसभा चुनाव बाद अब मध्यप्रदेश के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है। पिछले चुनावों से सबक सीखकर भाजपा ने 50 फीसदी दावेदारों की टिकिट काटने का निर्णय लिया है। इसमें हारे प्रत्याशी सहित उनकी टिकिट भी खतरे में है जिन्हें ढाई-तीन हजार मतों के अंतर से जीत मिली थी। इसीलिए प्रदेश भाजपा ने चुनाव के तीन माह पूर्व पड़ौसी राज्यों के विधायकों को बुलाकर सर्वे कराने व तमाम सीटों पर चुनावी रणनीति तैयार करने का जिम्मा सौंप दिया। यहां आए प्रवासी विधायक प्रदेश शासन के कद्दावर नेताओं और मंत्रियों के क्षेत्र में जाकर फ्रीहैंड कार्य कर रहे हैं। इनके द्वारा सर्वे और राय का टिकट वितरण से लेकर चुनाव में अहम स्थान रहेगा। अभी बुधनी-भैरूंदा क्षेत्र में आए पड़ौसी राज्य के प्रवासी विधायक ने मुख्यमंत्री शिवराज चौहान की 1 मतों से जीत होने की रिपोर्ट देकर उन्हें हरी झंडी दे दी है।