June 11, 2026 |

*दया कुछ तो गड़बड़ है : क्यों हैं समर्पित ‘आरएसएस’ कार्यकर्ता बगावत पर

सिद्धांतों को तिलांजलि देना पड़ेगा भारी

Hriday Bhoomi 24

#प्रदीप शर्मा सीनियर जर्नलिस्ट.

  • यह नया जमाना है और व्यवस्था परिवर्तन के लिए सत्ता जरूरी है, शायद भारतीय जनता पार्टी ने यह यंत्र जान लिया। मगर इसके लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे अनेक महान नेताओं के उस गुरूमंत्र को भुला दिया जिसने सत्ता की चाभी के अलावा सिद्धांतों की राजनीति पर जोर दिया था। शायद यही वजह है कि ‘आरएसएस’ के संघर्षों से पनपी भाजपा ने जब सत्ता की खातिर सिद्धांतों को तिलांजलि देकर, अन्य विचारों के नेताओं को साथ लेकर कुर्सी हथियाने पर जोर दिया। इसके नतीजन आपातकाल में जेल की सलाखों के पीछे रहे पुराने कार्यकर्ताओं और प्रचारकों में उबाल आना स्वाभाविक है।
    – हाल ही भोपाल में हुआ ऐसे पुराने कार्यकर्ताओं और प्रचारकों का सम्मेलन तथा उनके द्वारा
    ‘जनहित पार्टी’ बनाने का निर्णय भविष्य में शायद वर्तमान भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। कारण यह कि ये वो समर्पित लोग हैं जो जेल जाने से भी नहीं डरते।

Hriday Bhoomi 24

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