
हृदयभूमि टिमरनी।
मालवा, निमाण और भुआणा क्षेत्र में हर साल चैत्र मास के बाद फसल कटते ही गणगौर उत्सव की धूम रहती आई है। अब तो दीपावली के आसपास भी खरीफ कटते ही यह आयोजन खूब होने लगे हैं।
श्रद्धालुओं द्वारा गणगौर माता की पावनी लेकर गणगौर महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इसके तहत प्रथम दिवस गणगौर स्थापना से लेकर नौ दिनों तक विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। अंतिम दिन गणगौर माता की विदाई / विसर्जन का कार्यक्रम होता है। यहां पूरे नौ दिनों आयोजन स्थल पर माता की धूम बनी रहती है।
टिमरनी में रहटगांव रोड पर आयोजन
नगर में कुशवाहा परिवार एवं समस्त नगरवासी द्वारा गणगौर महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम नगर के वार्ड नंबर 14 स्थित रहटगांव रोड पर सिद्धि विनायक कौशल कालोनी में 3 अप्रैल से 11 अप्रैल तक होगा। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिसमें बाहर से आई सांस्कृतिक मंडलियों द्वारा मनोरंजक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। जिसे देखने के बड़ी संख्या में महिला पुरुषों का सैलाब जमा होगा।
नौ दिन होंगे कार्यक्रम
आयोजक परिवार से मिली जानकारी के अनुसार प्रथम दिवस 3 अप्रैल बुधवार चैत्र कृष्ण नवमी को खड़ा रखना एवं स्थापना दि. 03 अप्रैल आज होगी। इसके बाद पाट बैठना, मण्डपाच्छादन 10 अप्रैल 2024, बुधवार चैत्र सुदी दूज को होगा। अगले दिन प्रसादी भण्डारा 11 अप्रैल, गुरुवार प्रातः 11 बजे से होगा। अंतिम दिन 11 अप्रैल 2024, गुरूवार सायं 5 बजे गणगौर माता का विसर्जन किया जाएगा।
यहां दिन में रोजाना माता के झालने तथा रोज रात्रि में गणगौर मंडलियों द्वारा शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। इसमें हजारों श्रद्धालु जमा होकर मनोरंजन लाभ लेंगे। आयोजक परिवार ने क्षेत्र के सभी भक्तों से कार्यक्रम में शामिल होने का आह्वान किया है।
क्या है गणगौर महोत्सव
जानकारी इस महोत्सव तहत श्रद्धालु परिवार द्वारा माता की पावनी लेकर निर्धारित दिवस पर गणगौर की स्थापना की जाती है। इसमें माता पार्वती रनुबाई के रूप में आयोजक परिवार के यहां पधारती हैं। नौ दिनों तक माता के बचपन से लेकर बड़े होने तक बेटी की तरह उनका ख्याल रखा जाता है। फिर धनियर राजा के रूप में भगवान शंकर आते हैं। जिनके साथ रनुबाई का विवाह कर भावपूर्ण ढंग से विदाई की जाती है।
गुर्जर समाज का उत्सव
क्षेत्र में विशेषकर भुआणा और निमाण अंचल में यह पर्व गुर्जर समाज द्वारा आयोजित किया जाता है। वर्तमान समय में यह कार्यक्रम अन्य समाज के लोग भी करते हैं। ऐसा माना जाता है कि जिन संपन्न परिवारों में बेटियां नहीं होती उनके यहां माता रनुबाई (पार्वती) की पावनी बुलाकर उन्हें नौ दिनों तक बेटी की तरह अपने यहां रखकर देखभाल की जाती है। फिर धनियर राजा (भगवान भोले शंकर) के संग उनका विवाह घर विदा किया जाता है।
समां बांधती हैं मंडलियां
यहां होने वाले गणगौर महोत्सव आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र गणगौर मंडलियों की शानदार प्रस्तुति होती हैं। इन मंडलियों द्वारा माता गणगौर के भजनों के साथ छोटे-छोटे कथानक पर प्रस्तुति दी जाती है। इसमें मनोरंजन और हास्य का भी पुट होता है। इनमें कलाकारों द्वारा रचाए जाने वाले स्वांग और गीत-संगीत पर प्रस्तुति भी खास होती है। इसे देखने और सुनने के लिए बड़ी तादाद में लोग उमड़ते हैं।
आसपास सैकड़ों मंडलियां सक्रिय
हर साल क्षेत्र में जगह-जगह होने वाले गणगौर उत्सव कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए यहां सैकड़ों मंडल सक्रिय हैं। इन मंडलों के द्वारा पूरे वर्ष निरंतर तैयारी कर नित नई प्रस्तुति तैयार की जाती है। इसमें वर्तमान समय में आसपास हो रही घटनाओं और राजनीति पर चुटकियां ली जाती हैं। इससे लोगों का उत्साह बढ़ जाता है। इन मंडलियों को बुलाकर उन पर होने वाले खर्च आदि के कारण अब यह उत्सव काफी महंगा हो गया है।
