…और ये रहा आखिरी सवाल – कौन बनेगा हरदा का जनप्रतिनिधि ए ‘कमल’, बी ‘दोगने’ या सी ‘नोटा’
हरदा के आवाम का यह सवाल बूझ रहे चुनाव स्पेशलिस्ट

विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 135 हरदा सीट पर हुए सबसे रोचक चुनाव पर विशेषज्ञों की निगाहें लगी हुई हैं। सभी अपने-अपने गणित लगा रहे हैं कि इसमें कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. आरके दोगने की जीत होगी या भाजपा के कद्दावर नेता कमल पटेल फिर जीतकर अपनी विजय का ‘महा-रिकॉर्ड’ बनाएंगे। बहरहाल यह तो 3 दिसंबर की शाम तक पता चलेगा। फिर भी इन दोनों महारथियों के समर्थक पूरे आत्मविश्वास से बड़ी जीत का दावा कर रहे हैं।
क्या होगा दोनों की जीत का गणित
कमल : यूं तो इस सीट पर हुए चुनाव में दावे तो बहुत हो रहे हैं। मगर फैसले होते हैं किसी एक जगह सामूहिक मतदान से। ऐसा माना जाता है कि जब-जब बड़ी संख्या में वोटिंग हुई तब-तब भाजपा को जीत मिली। इस मान से हरदा में हुए लगभग 82 प्रतिशत मतदान ने अनुमान लगाने वालों के होश उड़ा दिए हैं।
– भाजपा समर्थक मानते हैं कि कमल पटेल के दरबार में यानी उनके सरकारी बंगले अथवा निज निवास बारंगा में आए हजारों लोगों को बिना किसी भेदभाव के उनकी समस्या हल कराई। इस दरबार में हरदा ही नहीं बल्कि प्रदेश के अनेक जिले से (जहां बड़े नाम वाले सूरमा थे) आने वाले लोगों के मामले अपने स्तर पर हल कराए।
– यह भी मान रहे कि कमल ने तमाम योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ आमजन की व्यक्तिगत समस्याओं को हल किया।
– वहीं शासन की तमाम योजनाएं हैं जिनके नाम का उल्लेख न करते हुए भाजपा की जीत सुनिश्चित मान रहे हैं।
कांग्रेस : पार्टी के समर्थकों के अनुमान हैं कि कर्मचारी व कुछ क्षेत्रों में ‘एंटी इन्कमबैंसी’ तथा प्रत्याशी आरके दोगने की सलोनी छवि के सहारे आगे बढ़ रही है। एक शिक्षाविद होने के नाते उनका बड़ा सम्मान भी है। मगर साथ में बड़ी टीम न होने से उन्हें स्वयं मोर्चा संभालना पड़ा।
वोटों का गणित
– शिवराजसिंह चौहान ने लगभग सभी वर्गों की मांगों को पूरा करने की घोषणा की।
– कमलनाथ भी ऐसी घोषणा कर रहे हैं।
– कर्मचारियों के नाराजी का सवाल अविश्वसनीय। किसी भी संगठन को दलों का भरोसा है या नहीं, सवालों में।
गणित तो ढेर सारे हैं मगर अभी इतना पर्याप्त।
इस प्रकार इन दोनों महारथियों के बीच
कौन बनेगा हरदा का जनप्रतिनिधि अभी सवालों के घेरे में है।