अभियान : अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह देश भर में उत्सव की तरह मनाने की तैयारी
हजारों जीवन आहुतियों और 7 सौ वर्षों के संघर्ष बाद अयोध्या आ रहे भगवान श्रीराम
हृदयभूमि विचार डेस्क

(चित्र साभार)
लगभग 6-7 सौ वर्षों के संघर्ष और हजारों जीवन की आहुतियों पश्चात आगामी 22 जनवरी को अयोध्या में बने भव्य राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। सभी श्रद्धालुओं को चाहिए कि यह आयोजन सिर्फ प्राण प्रतिष्ठा समारोह भर नहीं बल्कि यह एक उत्सव की तरह मनाया जाए।
इसलिए हर श्रद्धालु जो अयोध्या नहीं जा पा रहे हैं। उन्हें भी इस पावन दिवस के उपलक्ष में आयोजित *श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा अभियान* में सहभागी बनना है। इसकी तैयारी हमें ठीक उसी तरह करनी है, जिस तरह 14 वर्ष का वनवास भोगकर लौटे श्री राम की अगवानी अयोध्या में हुई और पूरे देश में दिवाली मनी। इसलिए हम सभी को इस प्रकार भागीदारी करनी है।
.गृह संपर्क अभियान –
⁃ 1 जनवरी से 15 जनवरी तक
• पूजित अक्षत, पत्रक व श्री राम मंदिर का चित्र यह तीन वस्तु को लेकर प्रत्येक घर में संपर्क करना है।
*• 22 जनवरी को*
⁃ पूर्वाह्न 11.00 से अपराह्न 1.00 बजे तक अपने ग्राम, नगर,मोहल्ला, कॉलोनी में स्थित किसी मंदिर में सभी रामभक्त को एकत्र होकर भजन कीर्तन करना है ।
⁃ बड़े पर्दे पर अयोध्या का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव साथ में देखें ।
⁃ शंखध्वनि, घंटानाद, प्रसाद वितरण करें ।
⁃ सभी मंदिरों में स्थित देवी देवता का भजन-कीर्तन-आरती-पूजा करना है ।
⁃ “श्री राम जय राम जय जय राम” विजय महामंत्र का १०८ बार सामूहिक जाप करना है ।
⁃ हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, रामरक्षा स्तोत्र आदि का सामूहिक पाठ कर सकते हैं ।
⁃ मंदिरों को अच्छे से सजाया जा सकता है ।
⁃ अपने अपने घर को अच्छे से सजा सकते है , जैसे तोरण, रंगोली, झालर इत्यादि सजावट कर सकते हैं ।
⁃ अपने क्षेत्र के सभी हिन्दू घरों में भगवा पताका लगा सकते हैं ।
⁃ संभव हो तो उस दिन प्राण प्रतिष्ठा तक उपवास रखें ।
⁃ यदि संभव हो तो भंडारे का आयोजन भी कर सकते हैं ।
⁃ सूर्यास्त के बाद अपने घर के सामने देवताओं की प्रसन्नता के लिये दीपक जलायें , दीपमालिका सजायें, दीपोत्सव मनायें।
*• पूर्व तैयारी*
⁃ अपने अपने क्षेत्र में प्रतिदिन प्रभात फेरी करके समाज में वातावरण बना सकते हैं ।
⁃ प्रत्येक मंदिर समिति , पुजारी के साथ बैठकर 22 जनवरी को होने वाले उत्सव की तैयारी में अधिक से अधिक समाज जन की सहभागिता सुनिश्चित कर सकते हैं ।
⁃ कार्यक्रम में सभी जाति, मत, पंथ से लोग जुड़े। यह कार्यक्रम संपूर्ण हिन्दू समाज का है यह संदेश भी जाना चाहिये ।
⁃ कार्यक्रम में माता-बहिन, बालक-युवा , किसान-कर्मचारी-व्यापारी, बाल-वृद्ध सभी को जोड़ना है।
⁃ यह कार्यक्रम के माध्यम से सामाजिक समरसता स्थापित हो यह अपेक्षित है ।
यह कार्यक्रम हिन्दू समाज में कार्यक्रम नहीं अपितु संपूर्ण हिन्दू समाज का कार्यक्रम बने।
( इस पोस्ट को सभी श्रद्धालु अधिक से अधिक शेयर करें ताकि अभियान को गति मिले )