May 1, 2026 |

धनकड़ साहब का इस तरह यूं जाना

न विदाई पार्टी हुई और न कार्यकाल पर कसीदे कसे

Hriday Bhoomi 24

प्रदीप शर्मा संपादक  

महान गायिका लता मंगेशकर का गाया एक गीत याद आ रहा है – तेरा जाना, दिल के अरमानों का लुट जाना। मगर यहां न तो दिल के अरमान लुटे और न दिल ही टूटा। एक राजनेता की लाइफटाइम पारी पर किसी ने आंसु भी न बहाए। मामला ताजा है, सो बिना किसी भूमिका के इसे हम सीधे-सीधे शुरू कर रहे हैं।  

बिना किसी विदाई पार्टी के उप-राष्ट्रपति एवं राज्यसभा अध्यक्ष जेपी धनकड़ साहब का इस तरह जाना चर्चा का विषय है, उनके इस्तीफे पश्चात सत्तारूढ़ दल से किसी ने भी उनके कार्यकाल की उपलब्धियों पर कसीदे नहीं कसे। अपने उप-राष्ट्रपति कार्यकाल के अभी दो वर्ष शेष होने के बावजूद ऐसा क्या हुआ कि उन्हें अचानक त्यागपत्र देकर जाना पड़ा। सभी जानकार लोग इसका असल कारण जानने के लिए अपने अपने कयास लगा रहे हैं। मगर असल माजरा अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि वे पिछले कुछ दिनों से विरोधी दलों के इशारे पर काम कर केंद्र की नीतियों को धत्ता बता रहे थे। 

हालिया घटनाक्रम – 

हाल ही केंद्र सरकार लोकसभा स्पीकर की अगुवाई में जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू करना चाह रही थी। मगर तब राज्यसभा में श्री धनखड़ ने अचानक विपक्ष द्वारा लाए गए जस्टिस वर्मा के ख़िलाफ़ महाभियोग का नोटिस स्वीकार कर लिया।

इस नोटिस पर 63 सांसदों के साइन थे और ये सभी सांसद विपक्ष के थे। श्री धनकड़ ने ये तब किया, जब राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा और वरिष्ठ मंत्री अनुपस्थित थे। सिर्फ क़ानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और जी. किशन रेड्डी मौजूद थे। केंद्र सरकार जहां लोकसभा में प्रस्ताव लाकर जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया का नेतृत्व कर न्यायिक सुधार की बड़ी मिसाल पेश करना चाहती थी। तब श्री धनकड़ ने राज्यसभा के माध्यम से इसमें विपक्ष की भी एंट्री करा दी।  

क्या था विपक्ष का खेल-

इस प्रस्ताव के साथ विपक्ष प्रयागराज हाईकोर्ट के जज जस्टिस शेखर यादव को हटाने के लिए महाभियोग लाने की योजना पर काम कर रहा था। जिन्होंने विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में कहा था कि यह देश किसी वर्ग विशेष की हिमायत से नहीं चलेगा।

इसका अर्थ यह हुआ कि जो केंद्र सरकार लोकसभा के माध्यम से जस्टिस वर्मा को हटाने के साथ जस्टिस शेखर यादव को बचाने में लगी थी, धनखड़ साहब केंद्र को बताए बिना विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार कर जस्टिस यादव को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने वाले थे।

अर्थात धनखड़ साहब विपक्ष की उस प्रक्रिया का हिस्सा बन गए थे, जिसके तहत नोटों के बोरे के मामले में फंसे जस्टिस वर्मा को बचाया जाना था और संघ के आनुवांशिक संगठन VHP के मंच से हिंदुत्व की हुंकार भरने वाले जस्टिस शेखर यादव को हटाया जाना था।

और ये उस भाजपा की सरकार में किए जाने का षड्यंत्र था, जो भाजपा ‘आरएसएस’ का ही आनुवंशिक संगठन है। ये ‘आरएसएस’, भाजपा, विहिप और स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कितनी शर्म की बात होती कि विहिप के मंच से हिंदुत्व की बात करने वाले जज को बीजेपी की सरकार में विपक्ष द्वारा बीजेपी से बने उपराष्ट्रपति के सहयोग से हटा दिया जाता ?

यही कारण था कि विपक्ष पिछले दो-तीन महीने से आक्रामक था क्योंकि राज्यसभा के सभापति शायद उनके अपने हो चुके थे।  विपक्ष की योजना थी कि राज्यसभा में केंद्र सरकार के बिल रोके जाएंगे, सरकार को राष्ट्र के सामने शर्मसार किया जाएगा।

सरकार को समय रहते इसकी भनक लग गई. इसके बाद राजनाथ सिंह के कार्यालय में 10-10 के ग्रुप में एनडीए के सांसद बुलाकर कोरे कागज पर साइन कराए। ये साइन इसके लिए थे कि अगर धनखड़ साहब नहीं माने तो उन्हें सरकार महाभियोग लाकर हटा देगी।

इसके बाद रात 8 बजे के बाद धनकड़ साहब को कॉल कर बताया कि आपके विरुद्ध सांसदों के साइन हो चुके हैं। अब आपको तय करना है। इसके बाद धनखड़ साहब ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफ़ा दिया।

जो विपक्ष धनखड़ साहब को झुकी कमर, संघी जाट, लोकतंत्र का भक्षक बता रहा था, उनके इस्तीफे पर वही विपक्ष उन्हें लोकतंत्र का रक्षक बताकर रुदन कर रहा।

और जिन पीएम मोदी ने हामिद अंसारी जैसे पीएफआई समर्थक उपराष्ट्रपति की विदाई पर उनके सम्मान में भाषण दिया था, ग़ुलाम नबी आज़ाद की विदाई पर भावुक हुए थे।

उन मोदी ने धनकड़ साहब की विदाई पर सिर्फ़ ये लिखा कि उन्हें बहुत से बड़े पदों पर काम करने का मौक़ा मिला है, वो जल्दी स्वस्थ हों। पीएम ने न तो धनखड़ साहब के योगदान की सराहना की और न कुछ ज़्यादा लिखा.

तो धनकड़ साहब की विदाई का असल माजरा यही है। 


Hriday Bhoomi 24

हमारी एंड्राइड न्यूज़ एप्प डाउनलोड करें

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Verified by MonsterInsights