
नईदिल्ली। देश में लोकसभा चुनाव 2024 के ऐन मौके पर यूं केंद्रीय चुनाव आयुक्त अरुण गोयल के चले जाने से अनेक सवाल खड़े हो गए हैं। देश के तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में 2 वर्ष पूर्व हुई उनकी नियुक्ति जिस प्रकार चर्चा में रही थी, उसी प्रकार अपने कार्यकाल के 3 साल पहले ही उनका यूं चले जाना अनेक सवालों को जन्म दे गया है।
जानकारी के मुताबिक चुनाव आयुक्त श्री गोयल द्वारा दिए गए इस्तीफे को राष्ट्रपति ने भी तत्काल स्वीकार कर लिया। जबकि अभी उनका 2027 तक कार्यकाल शेष था। अब उनके जाने बाद चुनाव निकाय के एकमात्र सदस्य सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार रह गए हैं। गोयल का इस्तीफा ऐसे समय में आया है। जब फरवरी में चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे की सेवानिवृत्ति बाद 3 सदस्यीय आयोग में पहले से ही दो सदस्य रह गए थे। चुनाव के ऐन मौके पर अचानक आए उनके इस्तीफे के अतर्निहित कारणों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। इलेक्शन कमीशन में आयुक्त अरुण गोयल के हटने से एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आ गया है।
चर्चित रही थी गोयल की नियुक्ति
पूर्व आईएएस अधिकारी अरुण गोयल ने 21 नवंबर 2022 को चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार ग्रहण किया। तभी उनकी नियुक्ति पर विवाद खड़ा हो गया था, क्योंकि वह केंद्रीय भारी उद्योग सचिव थे। उन्होंने 18 नवंबर 2022 को भारतीय प्रशासनिका सेवाओं से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना था। मगर उन्हें केंद्रीय चुनाव आयोग में इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कर दिया गया।
अत्यंत मेघावी थे गोयल
7 दिसंबर 1962 को पटियाला में जन्मे अरुण गोयल ने एम.एससी की डिग्री प्राप्त की। पंजाब यूनिवर्सिटी में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए चांसलर मेडल ऑफ एक्सीलेंस से सम्मानित किया गया। उनके पास कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के चर्चिल कॉलेज से विकास अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री है। उन्होंने जॉन एफ कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। 1985 बैच, पंजाब कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी के रूप में कार्य करने वाले अरुण गोयल ने 37 वर्षों से अधिक सेवा की।
