#वन सुरक्षा : बोरपानी में लगा अनुभूति शिविर
स्कूली बच्चों को दी वन और वन्यप्राणियों की सुरक्षा जानकारी

हृदयभूमि, हरदा।
जिले के बोरपानी रेंज में “मैं भी बाघ” एवं ” हम हैं बदलाव” की थीम पर स्कूली विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण संरक्षण अनुभूति कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यार्थियो को वन, वन्यजीवों एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश इको पर्यटन बोर्ड द्वारा आयोजित प्रशिक्षण, प्रचार सह जागरूकता शिविर अंतर्गत गत दिवस मुख्य वनसंरक्षक नर्मदापुरम् अशोक कुमार के निर्देशन एवं वनमंडल अधिकारी हरदा सामान्य अनिल चोपड़ा के कुशल मार्गदर्शन में परिक्षेत्र बोरपानी मे “अनुभूति कार्यक्रम” का आयोजन वन क्षेत्र में किया गया।

कार्यक्रम के अतिथि –
शिविर में ओमप्रकाश बिडारे उप वनमंडल अधिकारी दक्षिण हरदा, श्रीमती नीता शाह परिक्षेत्र अधिकारी बोरपानी, अध्यक्ष एवं सचिव वन सुरक्षा समिति एवं परिक्षेत्र का समस्त स्टाफ उपस्थित रहे|शिविर में शासकीय हाई स्कूल कचनार एवं बोरपानी के 123 छात्र-छात्राए, 5 शिक्षक-शिक्षिकाए सम्मिलित हुए।

दी जानकारी –
उपवनमंडल अधिकारी एवं परिक्षेत्र अधिकारी बोरपानी द्वारा वन वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण और लाईफ मिशन से संबंधित जानकारी दी गई। अनुभूति मास्टर ट्रेनर और प्रेरक हरिओम सोलंकी वनरक्षक एवं अन्य प्रेरकों ने अनुभूति थीम “मैं भी बाघ” एवं “हम है बदलाव” की जानकारी देकर पारिस्थितिक तंत्र में वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के महत्व, विभिन्न जीव जंतुओं के मध्य पारस्परिक संबंध को समझाया गया।

अनेक गतिविधियां हुईं-
अनुभूति प्रकृति पथ भ्रमण के दौरान विभिन्न वृक्षों की पहचान, वन्यजीव एवं उनके साक्ष्यों की पहचान, मृग एवं हिरण प्रजाति में अंतर, दीमक की बामी ,मकड़ी के जाल के महत्व को बताया गया। लाइफ मिशन के तहत पर्यावरण के संरक्षण में अपनी दैनिक कार्यों की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव कर हम सभी का कर्तव्य बताया। खेल खेल में संरक्षण शिक्षण अंतर्गत खाद्य, जल, वन अपराध संबंधी सांप सीढ़ी (जंगल का कानून), पक्षियों के माइग्रेशन में व्यवधान आदि खेलों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण रोचक ढंग से समझाया गया, ईको पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा प्रदाय किए गए पेपर से बाघ बनाएं गये, बिना सिले कपड़े से थैली बनाना सिखाया, “मैं भी बाघ” एवं “हम है बदलाव” गान डांस के साथ करवाया गया, वृक्षों एवं वन्य जीवो की पहचान एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता करवाई गई। इसमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। अंत में पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जागरूकता हेतु अनुभूति की शपथ ग्रहण कराई गई।

