यक्षप्रश्न : छिंदवाड़ा-आमला मेमो ट्रेन में महिलाएं असुरक्षित
न है महिला कोच और आरपीएफ की पुलिस सुरक्षा

राजेंद्र अग्रवाल
“वरिष्ठ पत्रकार “एवं राष्ट्रीय संगठन मंत्री ब्रॉड गेज रेलवे संघर्ष समिति छिंदवाड़ा
हृदयभूमि, छिंदवाड़ा।
रेलवे में महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा यक्षप्रश्न बना हुआ है। यहां छिंदवाड़ा-आमला मेमो ट्रेन में महिलाओं के लिए पृथक कोच न होने के साथ आरपीएफ पुलिस भी न होने से यात्रा करने वाली महिलाएं असुरक्षित हैं।
वरदान नहीं समस्या बनी मेमो ट्रेन –
ज्ञात रहे कि इस ट्रेन में आमला से छिंदवाड़ा के लिए रोजगार, नौकरी और शिक्षा आदि के लिए सैकड़ों लोग सफर करते हैं। मगर महिलाओं के लिए पृथक से कोच न होने के कारण उन्हें पुरुषों वाले काॅमन कोच में सफर करना पड़ता है। इस दौरान यात्री महिलाओं, युवतियों और छात्राओं को असामाजिक तत्वों की छींटाकसी व छेडछाड़ का शिकार होना पड़ता है। फब्ती कसने वाले ऐसे मनचलों पर नकेल कसने ट्रेन में आरपीएफ पुलिस भी नहीं है। इससे यात्रा करने वाली आधी आबादी स्वयं को असुरक्षित महसूस करती है।
मेमो ट्रेन में समस्या का भंडार –
इस ट्रेन में मादक पदार्थ को विक्रय करने वाले लोग भी सफर करते हैं। इसकी बाथरूम में शराब की बोतलें यहां-वहां पड़ी मिलती है। बाथरूम भी इतना गंदा रहता है कि उसका उपयोग करने जाना भी त्रासदी की तरह है। वहीं कुछ लैला-मजनू भी ट्रेन में आपत्तिजनक हरकत करते नजर आते हैं। हाल यह है कि ट्रेन में जुएं का खेल चलता रहता है। कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है। इस ट्रेन म बोगियों की कमी के कारण सभी बोगी खचाखच भरी होती हैं। अपराधी प्रवृत्ति के लोग सीटों पर कब्जा कर लेते हैं। इससे बुजुर्ग एवं महिलाएं खड़े रहकर सफर करने को मजबूर होते हैं।
